प. बंगाल में 225 सीट के साथ सत्ता बरकरार रखेगी तृणमूल कांग्रेस: अभिषेक बनर्जी
प. बंगाल में 225 सीट के साथ सत्ता बरकरार रखेगी तृणमूल कांग्रेस: अभिषेक बनर्जी
कोलकाता, 25 अप्रैल (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को दावा किया कि उनकी पार्टी 294 सदस्यीय विधानसभा में लगभग 225 सीट जीतकर पश्चिम बंगाल में सत्ता बरकरार रखेगी।
अभिषेक बनर्जी ने बाली में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए दो से तीन वर्षों के भीतर भाजपा को केंद्र से उखाड़ फेंकने का संकल्प भी लिया।
उन्होंने यह भी दावा किया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) के कारण हुई ‘प्रताड़ना’ पर बंगाली मतदाताओं की प्रतिक्रिया 4 मई के बाद ही पता चलेगी, जब चुनाव परिणाम घोषित होंगे।
पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है।
तृणमूल कांग्रेस सांसद ने कहा, “हमने पहले चरण में शतक का आंकड़ा पार कर लिया है और दूसरे चरण में हम दोहरा शतक बनाएंगे। हमारी सीटों की संख्या 225 से नीचे नहीं जाएगी।”
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी ने पांच साल पहले हुए चुनाव में 213 सीट जीती थीं। उन्होंने कहा, “हम यहां चौथी बार सरकार बना रहे हैं और अगले दो-तीन वर्षों में हम भाजपा को दिल्ली से उखाड़ फेंकेंगे।”
प्रधानमंत्री के पहले चरण के मतदान वाले दिन बेलूर स्थित रामकृष्ण मठ और मिशन मुख्यालय के दौरे को निशाना बनाते हुए बनर्जी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी को 4 मई के बाद प्रार्थना के लिए लौटना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित बेलूर मठ का दर्शन करना या चुनाव के दौरान बंगाल के लोकप्रिय स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ का स्वाद लेना काफी नहीं है।
उन्होंने कहा, “स्वामीजी को चुनाव के दौरान ही याद न करें। 4 मई के बाद प्रार्थना करने के लिए वापस आएं। और सिर्फ झालमुड़ी ही क्यों? कोलकाता के फुचका, घुगनी, मिठाइयां और रसगुल्ला भी अच्छे हैं।’’
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री के हाल ही में झाड़ग्राम की एक सड़क किनारे की दुकान पर झालमुड़ी खाने जाने पर कटाक्ष करते हुए बनर्जी ने कहा कि जिस सड़क पर मोदी चले और जिस फुटपाथ पर खड़े होकर उन्होंने झालमुरी का आनंद लिया, वह ममता बनर्जी सरकार ने बनवाया था, और विक्रेता बिहार के गया का है।
उन्होंने सवाल किया, “अगर भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार ने इतना रोजगार पैदा किया है, तो बिहार का एक लड़का झाड़ग्राम में झालमुरी क्यों बेच रहा है? बिहार में रोजगार कहां गया?”
बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार ने पिछले एक दशक में एमएसएमई क्षेत्र में 1.12 करोड़ नौकरियां सृजित की हैं और भाजपा को इस आंकड़े पर सवाल उठाने की चुनौती दी।
तृणमूल सांसद ने ‘डबल इंजन’ वाली सरकारों वाले राज्यों में आर्थिक उत्थान के संबंध में भाजपा के दावों पर भी सवाल उठाए।
जनता की सर्वोच्चता को राज्य की शक्ति से ऊपर बताते हुए बनर्जी ने दावा किया कि मोदी सरकार का ‘अहंकार’ चकनाचूर हो जाएगा क्योंकि जनता ने विधानसभा चुनावों में तृणमूल को विजेता बनाने का मन बना लिया है।
उन्होंने दावा किया कि भारी संख्या में केंद्रीय बलों, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय), निर्वाचन आयोग को लगाये जाने और भाजपा के कई मुख्यमंत्रियों के समर्थन के बावजूद, सभी सर्वेक्षणों से पता चलता है कि तृणमूल लगातार चौथी बार बंगाल में सत्ता में आएगी।
इससे पहले दिन में दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में एक अन्य रैली में, तृणमूल कांग्रेस नेता ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) पर भाजपा की ‘बी-टीम’ होने का आरोप लगाया।
बनर्जी ने कहा कि भांगर में, जहां मुस्लिम आबादी काफी अधिक है, लोग तृणमूल कांग्रेस सरकार की विकास परियोजनाओं के आधार पर मतदान करेंगे, न कि धर्म के आधार पर।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा मुहैया कराई गई केंद्रीय सुरक्षा प्राप्त है और उन्होंने इसके पीछे के ‘सौदे’ का खुलासा करने की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘भांगर में चुनाव धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि कर्म के आधार पर लड़ा जाएगा – भोजन, वस्त्र, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के आधार पर।’ उन्होंने मतदाताओं से आग्रह किया कि वे विभाजनकारी राजनीति से प्रभावित न हों।
बनर्जी ने आईएसएफ-वाम गठबंधन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन बनाने के बावजूद, आईएसएफ ने नंदीग्राम में उम्मीदवार खड़ा किया है, जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का भी उम्मीदवार है।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘इसका सिर्फ एक ही मतलब है: अल्पसंख्यक मतों को बांटना और भाजपा को जीत दिलाने में मदद करना।’
नंदीग्राम से भाजपा के उम्मीदवार विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी हैं।
बांग्लादेश की सीमा से लगे बसीरहाट में एक और रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि भगवा खेमा बंगालियों को सांस्कृतिक रूप से हाशिए पर धकेलने का प्रयास कर रहा है, और आगामी विधानसभा चुनाव केवल एक राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि ‘बदले के लिए वोट’ है।
उन्होंने भाजपा पर बंगालियों को उनकी मातृभाषा बोलने के लिए ‘बांग्लादेशी’ कहकर निशाना बनाने का आरोप लगाया और कहा कि बंगाली पहचान और संस्कृति खतरे में है।
उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया वास्तविक बंगाली मतदाताओं को लंबी कतारों में खड़ा करके और सूची से नाम हटाकर उन्हें मताधिकार से वंचित करने के लिए बनाई गई थी।
भाषा अमित माधव
माधव

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