त्रिपुरा: पूर्व उग्रवादियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन रेल-सड़क रोको आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी

त्रिपुरा: पूर्व उग्रवादियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन रेल-सड़क रोको आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी

त्रिपुरा: पूर्व उग्रवादियों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन रेल-सड़क रोको आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी
Modified Date: June 23, 2026 / 08:19 pm IST
Published Date: June 23, 2026 8:19 pm IST

अगरतला, 23 जून (भाषा) त्रिपुरा में आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों के दो संगठनों ने उचित पुनर्वास और लंबित मुकदमों को वापस लेने सहित अपनी नौ सूत्रीय मांगों को लेकर बुधवार से अनिश्चितकालीन रेल और सड़क रोको आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

संयुक्त पुनर्वास कार्रवाई समिति (जेएआरसी)और संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने आरोप लगाया कि दशकों पहले बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों को अभी तक पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है।

जेएआरसी-जेएसी के संयोजक जिबनजॉय रेआंग ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकार की अपील के बाद, 1978 से अब तक अलग-अलग प्रतिबंधित संगठनों के लगभग 15,000 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से कुछ का पुनर्वास हो गया है, लेकिन अधिकतर अब भी उनसे किये गए वादों के अनुसार मिलने वाले लाभ की प्रतीक्षा कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि कई पूर्व उग्रवादी अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में संघर्ष कर रहे हैं और आत्मसमर्पण के बावजूद कई के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

रेआंग ने कहा, ‘‘हमने सामान्य जीवन जीने के लिए आत्मसमर्पण किया था, लेकिन तीन दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी हमारे कई सदस्यों का पुनर्वास नहीं हुआ है। कई सदस्यों के खिलाफ लंबित मामले भी वापस नहीं लिए गए हैं।’’

उन्होंने कहा कि संगठनों ने मुख्यमंत्री माणिक साहा को एक ज्ञापन और नौ सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा है और सरकार को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का समय दिया था।

रेआंग ने कहा, ‘‘हमने जनजातीय कल्याण मंत्री विकास देबबर्मा के सामने भी अपनी चिंताएं रखीं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इसलिए, हमने बुधवार से अनिश्चितकालीन रेल-सड़क नाकेबंदी शुरू करने का फैसला किया है।’’

इस महीने की शुरुआत में, प्रतिबंधित नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी)और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ) से जुड़े पूर्व उग्रवादियों ने मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद रेल और राजमार्ग बाधित करने की अपनी अपील को वापस ले लिया था।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


लेखक के बारे में