बंगाल में यूसीसी: शुभेंदु ने उच्चाधिकार समिति का ऐलान किया, अगस्त में विधेयक लाये जाने की संभावना

बंगाल में यूसीसी: शुभेंदु ने उच्चाधिकार समिति का ऐलान किया, अगस्त में विधेयक लाये जाने की संभावना

बंगाल में यूसीसी: शुभेंदु ने उच्चाधिकार समिति का ऐलान किया, अगस्त में विधेयक लाये जाने की संभावना
Modified Date: June 29, 2026 / 10:11 pm IST
Published Date: June 29, 2026 10:11 pm IST

कोलकाता, 29 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की प्रक्रिया सोमवार को औपचारिक रूप से शुरू कर दी। उन्होंने प्रस्तावित कानून का खाका तैयार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की।

अधिकारी ने कहा कि समिति को चार हफ्ते के अंदर अपनी सिफारिशें सौंपने को कहा गया है, जिससे अगस्त में विधानसभा के विस्तारित बजट सत्र के दौरान सरकार के लिए यूसीसी विधेयक पेश करने का रास्ता साफ हो जाएगा।

मौजूदा विधानसभा सत्र के आखिरी दिन मुख्यमंत्री ने घोषणा करते हुए कहा कि राज्य मंत्रिमंडल दो जुलाई को होने वाली अपनी बैठक में मसौदा विधेयक पर विचार करेगी, ताकि इसे विधानसभा में पेश करने के लिए अंतिम रूप दिया जा सके।

यह कदम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की सबसे अहम विधायी पहल में से एक है, जो उसके चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए एक प्रमुख वादे को पूरा करता है।

अधिकारी ने बताया कि प्रस्तावित कानून को गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026, असम यूसीसी कानून और उत्तराखंड समान नागरिक संहिता अधिनियम, 2024 के आधार पर तैयार किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून में राज्य के आदिवासी, मूल निवासी, कुड़मी और आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त अन्य जनजातीय समुदायों को छूट दी जाएगी, जैसा कि उत्तराखंड और गुजरात मॉडल के तहत छूट दी गई है।

अधिकारी ने उन नौ मुख्य क्षेत्रों के बारे में बताया जिन्हें प्रस्तावित कानून एक समान कानूनी ढांचे के तहत विनियमित करना चाहता है। इनमें शादी, तलाक, गुजारा-भत्ता, विरासत, गोद लेना और पारिवारिक कानून के अन्य पहलू शामिल हैं, जो अभी धर्म पर आधारित अलग-अलग वैयक्तिक कानूनों से संचालित होते हैं।

विधानसभा को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा, ‘‘भाजपा ने अपने चुनावी घोषणापत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया था और सरकार उस वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

उन्होंने कहा, “हम अपनी बात पर कायम हैं। हमने अपने घोषणापत्र में जो कुछ भी वादा किया है, उसे लागू किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में यूसीसी हर हाल में लागू किया जाएगा।”

एक अधिकारी ने बताया कि इस समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई करेंगी। समिति में एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, एक विधि विशेषज्ञ, एक शिक्षाविद, एक समाजसेवी और राज्य प्रशासन के एक अतिरिक्त सचिव शामिल होंगे। अतिरिक्त सचिव समिति के सदस्य सचिव के तौर पर भी काम करेंगे और इसके प्रशासनिक कामकाज को देखेंगे।

समिति के कामकाज के दायरे के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समिति राज्य में अभी लागू वैयक्तिक और पारिवारिक कानूनों की व्यापक समीक्षा करेगी और एक साझा कानूनी ढांचा लागू करने की संभावनाओं की जांच करेगी।

अधिकारी ने सदन को बताया कि समिति से यह भी उम्मीद है कि वह अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित पक्षों से सुझाव या विचार आमंत्रित करेगी।

विपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने प्रस्तावित कानून के विरोध में नारे लगाए। इसपर प्रतिक्रिया देते हुए अधिकारी ने कहा कि जिन लोगों को कोई आपत्ति या सुझाव है, वे सीधे उच्च-स्तरीय समिति को सौंप सकते हैं।

भाषा प्रशांत सुभाष

सुभाष


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