उमर खालिद ने जमानत नामंजूर करने वाले न्यायालय के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया
उमर खालिद ने जमानत नामंजूर करने वाले न्यायालय के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर उस फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया है जिसमें उसे जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
न्यायालय ने यह देखते हुए कि 2020 के दिल्ली दंगों के पीछे की साजिश के संबंध में उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विश्वास करने के लिए उचित आधार है, जमानत देने से इंकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारी की पीठ से खालिद की ओर से अदालत में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने अनुरोध किया कि पुनर्विचार याचिका को खुली अदालत में सूचीबद्ध किया जाए।
सिब्बल ने कहा कि यह मामला 16 अप्रैल को न्यायाधीशों के समक्ष विचार के लिए आएगा और उन्होंने खुली अदालत में सुनवाई के लिए एक आवेदन दायर किया है।
न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, “हम कागजात देखेंगे। जरूरत पड़ने पर हम इस मामले में सुनवाई करेंगे।”
न्यायालय के नियमों के अनुसार, समीक्षा याचिकाओं पर उन न्यायाधीशों द्वारा विचार किया जाता है जिन्होंने किसी स्पष्ट त्रुटि या सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के परिणामस्वरूप हुए गंभीर अन्याय को दूर करने के लिए चैंबर में निर्णय सुनाया हो या आदेश पारित किया हो। पुनर्विचार का अनुरोध करने वाले पक्ष न्यायाधीशों से खुली अदालत में सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं ताकि विचाराधीन निर्णय के कारण हुए गंभीर अन्याय को दूर किया जा सके।
पांच जनवरी को, खालिद के अलावा, शीर्ष अदालत ने शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन पांच अन्य को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि सभी आरोपी एक समान स्थिति में नहीं हैं।
अदालत ने मुकदमे में देरी के उनके तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि खालिद और इमाम, जो 2020 से जेल में बंद हैं, संरक्षित गवाहों की जांच के बाद या आदेश पारित होने के दिन से एक वर्ष बाद नयी जमानत याचिका दायर कर सकते हैं।
न्यायालय ने कहा था कि गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) के तहत खालिद और इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, और अभियोजन सामग्री से पता चलता है कि वे दंगों की “साजिश रचने, लामबंदी करने और रणनीतिक निर्देशन” में शामिल थे।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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