उपहार सिनेमा त्रासदी के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट मामले में अदालत ने आरोप तय किए

उपहार सिनेमा त्रासदी के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट मामले में अदालत ने आरोप तय किए

उपहार सिनेमा त्रासदी के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट मामले में अदालत ने आरोप तय किए
Modified Date: January 24, 2026 / 05:13 pm IST
Published Date: January 24, 2026 5:13 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने उपहार अग्निकांड के दोषी सुशील अंसल के खिलाफ एक अलग मामले में आपराधिक मामलों को छिपाने और पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए झूठी घोषणा प्रस्तुत करने के आरोप में शनिवार को औपचारिक रूप से आरोप तय किए। इसके साथ ही मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

पिछले साल दिसंबर में एक अदालत ने अंसल के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 177 (लोक सेवक को गलत जानकारी देना) और 181 (शपथ पर झूठा बयान देना) और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 (पासपोर्ट से संबंधित अपराध) के तहत अपराधों के लिए आरोप तय करने का आदेश दिया था।

वर्ष 2019 में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने अंसल के खिलाफ झूठी जानकारी देने के आरोप में मामला दर्ज किया था, क्योंकि उन्होंने 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड में अपनी दोषसिद्धि के बारे में नहीं बताया था।

उच्चतम न्यायालय ने अंसल बंधुओं गोपाल और सुशील अंसल को 13 जून, 1997 को फिल्म ‘बॉर्डर’ के प्रदर्शन के दौरान हॉल में लगी आग के संबंध में लापरवाही के कारण मौत का दोषी ठहराया था और उन्हें एक साल जेल की सजा सुनाई गई थी। आग की घटना में 59 लोगों की मौत हो गई थी।

शनिवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मृदुल गुप्ता ने औपचारिक रूप से आरोप तय किए, जिस पर सुशील अंसल ने निर्दोष होने का दावा किया और मुकदमे का सामना करने की बात कही।

अंसल वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पेश हुए, क्योंकि उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट संबंधी याचिका अदालत ने स्वीकार कर ली थी।

अदालत ने मामले में अभियोजन के साक्ष्य को पेश करने के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है।

इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए, उपहार त्रासदी पीड़ितों के समूह (एवीयूटी) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि यह अंसल के खिलाफ तीसरा आपराधिक मामला है, जो ‘जवाबदेही से बचते रहे हैं।’

कृष्णमूर्ति ने कहा कि हर बार उन्हें ‘ज्यादा उम्र’ के आधार पर छोड़ दिया जाता है या रियायतें दी जाती हैं।

कृष्णमूर्ति ने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति कब तक एक के बाद एक अपराध करता रहेगा और उचित जवाबदेही से बचता रहेगा? न्याय व्यवस्था को एक स्पष्ट संदेश देना होगा; बार-बार गलत काम करना जीवन भर बचने का बहाना नहीं बन सकता।’’

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


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