‘चढ़ावा चोरी’ मामले में विहिप का पत्र ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ का उदाहरण: कांग्रेस
‘चढ़ावा चोरी’ मामले में विहिप का पत्र ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ का उदाहरण: कांग्रेस
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा अयोध्या पुलिस को लिखे गए एक पत्र को लेकर सोमवार को उस पर निशाना साधा और कहा कि उसकी स्थिति ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ जैसी है तथा वह अपने लोगों के नैतिक पतन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, विहिप द्वारा अयोध्या पुलिस को पत्र लिखकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं के उन दावों की जांच कराने तथा उन्हें उनके आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तलब किए जाने की मांग की गई है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने कहा कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए विहिप का पत्र ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ का एक उदाहरण है।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जिस विहिप पर अतीत में निर्मोही अखाड़े ने ‘1,400 करोड़ रुपये के राम मंदिर घोटाले’ का आरोप लगाया था, जबकि वह अब कथित लूट पर सवाल उठाने वाले विपक्षी नेताओं से पूछताछ की मांग कर रही है।
वेणुगोपाल ने कहा, “यह मांग जितनी हास्यास्पद है, उतनी ही बेशर्मी भरी भी है। जब स्वयं विहिप पर सवाल उठ चुके हैं, तब विपक्ष पर उंगली उठाने का उसके पास न तो नैतिक अधिकार है और न ही विश्वसनीयता।”
उन्होंने कहा, “आखिरकार, मंदिर ट्रस्ट की स्थापना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय विहिप के उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रचारक रहे हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव रहे हैं, जिन्हें भाजपा सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया है। केंद्र और राज्य, दोनों जगह भाजपा की सरकार है। ऐसे में प्रियंका जी, अखिलेश जी या अन्य विपक्षी नेता इस मामले में कैसे प्रासंगिक हो सकते हैं?”
वेणुगोपाल ने दावा किया कि सच्चाई यह है कि विहिप और संघ परिवार पूरी तरह बेनकाब हो चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया, “विवादास्पद राम मंदिर आंदोलन लंबे समय से ‘चंदा चोरी’ के आरोपों से घिरा रहा है और ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि हिंदुओं के स्वयंभू ‘रक्षक’ न तो धर्म से जुड़े हैं और न ही भगवान राम से। वे केवल श्रद्धालुओं की आस्था का शोषण करते हैं और भगवान राम के नाम का राजनीतिक तथा आर्थिक लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं।”
भाषा हक प्रशांत
प्रशांत

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