विजयन ने रेड्डी पर पलटवार किया, केरल आकर कल्याणकारी मॉडल के बारे में जानने का न्योता दिया
विजयन ने रेड्डी पर पलटवार किया, केरल आकर कल्याणकारी मॉडल के बारे में जानने का न्योता दिया
तिरुवनंतपुरम, तीन अप्रैल (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी पर बृहस्पतिवार को पलटवार करते हुए उन्हें अपने राज्य का दौरा करने और वहां लागू कल्याणकारी मॉडल के बारे में जानने का न्योता दिया।
रेड्डी ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार करते हुए राज्य में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की कड़ी आलोचना की थी।
विजयन ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री को “किसी ने गलत जानकारी दी है।” उन्होंने रेड्डी पर अपने राज्य की कमजोरियों को छिपाने और केरल तथा उसके लोगों का “मजाक उड़ाने” का आरोप लगाया।
विजयन ने कहा, “अपने राज्य में गरीबों के मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने की घटना को जानबूझकर नजरअंदाज करते हुए वह केरल को सामाजिक प्रगति और जन कल्याण पर उपदेश देने के लिए तैयार दिखते हैं-स्पष्ट रूप से उन्हें किसी ने बहुत ही गलत जानकारी दी है।”
उन्होंने लिखा, “तेलंगाना के मुख्यमंत्री का केरल में स्वागत है। वह यहां आकर कल्याणकारी मॉडल के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।”
विजयन ने कहा कि केरल “सतत और समावेशी विकास” के जरिये आगे बढ़ रहा है। उन्होंने रेड्डी पर राज्य को कमजोर करने की कोशिश करने वालों का समर्थन करने का भी आरोप लगाया।
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता के रेड्डी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए विजयन ने कहा, “उनका (रेड्डी) दावा है कि केरल ‘भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता’ से ग्रस्त है, लेकिन उन्हें आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करना चाहिए। क्या उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि केरल देश के राज्यों में से एक है, जहां भ्रष्टाचार सबसे कम है?”
उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि केरल नीति आयोग के सतत विकास सूचकांक (2023-24) में 79 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा, जबकि तेलंगाना छठे पायदान पर था।
विजयन ने लिखा, “नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, केरल में गरीबी दर मात्र 0.55 फीसदी है, जो भारत में सबसे कम है।” उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, तेलंगाना में गरीबी दर 5.88 प्रतिशत है।
विजयन ने कहा कि केरल में साक्षरता दर 95.3 प्रतिशत है, जो तेलंगाना की 76.9 फीसदी से कहीं अधिक है। उन्होंने कहा, “केरल में शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) घटकर प्रति 1,000 जीवित प्रसव पर पांच हो गई है, जबकि तेलंगाना में यह इससे लगभग चार गुना ज्यादा है।”
विजयन ने कहा, “मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों के कारण एक औसत मलयाली एक औसत भारतीय की तुलना में पांच से सात साल अधिक जीता है।”
भाषा पारुल दिलीप
दिलीप

Facebook


