नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट, भूराजनीतिक उथल-पुथल प्रमुख एजेंडे में शामिल
नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट, भूराजनीतिक उथल-पुथल प्रमुख एजेंडे में शामिल
नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) भारतीय नौसेना के शीर्ष कमांडर मंगलवार से शुरू होने वाले तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के संदर्भ में पश्चिम एशिया संकट के निहितार्थों पर विचार-विमर्श करेंगे।
कमांडर राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों के अनुरूप क्षमता विकास के लिए नौसेना की परिचालन स्थिति की व्यापक समीक्षा भी करेंगे।
भारतीय नौसेना के छमाही कमांडर्स सम्मेलन 2026 का पहला संस्करण 14 से 16 अप्रैल 2026 तक तीन दिनों के लिए नयी दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
नौसेना ने रविवार को कहा, “पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और हिंद महासागर क्षेत्र में बहुराष्ट्रीय बलों (एमएनएफ) के आने के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए त्वरित नौसैनिक तैनाती को देखते हुए, इस सम्मेलन का विशेष महत्व है।”
हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों के आवागमन में व्यवधान को देखते हुए भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा में इसकी क्या भूमिका है, इस बारे में नौसेना ने विस्तार से नहीं बताया।
पिछले कई वर्षों से, भारतीय नौसेना भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों, विशेष रूप से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस ले जाने वाले जहाजों को, ओमान की खाड़ी से सुरक्षित रूप से गुजरने के लिए सुरक्षा प्रदान कर रही है।
नौसेना ने कहा कि नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, अभियान कमांडरों और नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ मिलकर वर्तमान भू-रणनीतिक वातावरण में बहुआयामी चुनौतियों से निपटने की योजनाओं की समीक्षा और मूल्यांकन करेंगे।
उसने कहा, “सुरक्षा संबंधी अनिवार्यताओं के साथ-साथ, विचार-विमर्श में निर्णायक परिचालन सफलता प्राप्त करना, समुद्री क्षमताओं को बढ़ाना, प्रशिक्षण, मानव संसाधन प्रबंधन, सतत रखरखाव पद्धतियां, मानवरहित प्रणालियों का प्रभावी उपयोग, परिचालन रसद और प्लेटफार्मों की युद्ध तत्परता के लिए अन्य प्रमुख कारकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।”
इसमें कहा गया है कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन उन लोगों में शामिल होंगे जो कमांडरों को संबोधित करेंगे।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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