कांग्रेस के समर्थन से विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, पर राज्यपाल ने अभी निर्णय नहीं लिया

कांग्रेस के समर्थन से विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, पर राज्यपाल ने अभी निर्णय नहीं लिया

कांग्रेस के समर्थन से विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया, पर राज्यपाल ने अभी निर्णय नहीं लिया
Modified Date: May 6, 2026 / 10:23 pm IST
Published Date: May 6, 2026 10:23 pm IST

चेन्नई, छह मई (भाषा) तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) प्रमुख विजय ने बुधवार को तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश किया। कांग्रेस ने एक बड़े राजनीतिक बदलाव और नए गठजोड़ के तहत अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी को समर्थन देने की घोषणा की और चुनाव पूर्व सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) से संबंध तोड़ लिए।

द्रमुक और अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने द्विध्रुवीय वर्चस्व को तोड़ते हुए टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के दो दिन बाद राज्यपाल कार्यालय से निमंत्रण मिलने पर टीवीके प्रमुख ने लोक भवन में अर्लेकर से मुलाकात की और उन्हें समर्थन देने वाले कांग्रेस विधायकों की सूची सौंपी।

हालांकि, लोक भवन के सूत्रों ने संकेत दिया कि विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने के संबंध में अभी तक कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि राज्यपाल अर्लेकर विजय के पास समर्थन होने के दावे से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।

टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार के गठन में लोक भवन द्वारा की गई देरी की आलोचना करते हुए कांग्रेस की लोकसभा सांसद ज्योतिमणि ने कहा, ‘‘बहुमत साबित करने का स्थान विधानसभा है। लोक भवन में बहुमत साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा को तुरंत लोक भवन के माध्यम से राजनीति करना बंद करना चाहिए। राज्यपाल को तुरंत टीवीके नेता विजय को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।’’

टीवीके ने 234 सदस्यीय विधानसभा में से 108 सीटें जीतीं, को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत के आंकड़े से 10 कम है। कांग्रेस की पांच सीटों के साथ, विजय द्वारा जीती गई दो सीटों में से एक को छोड़कर, कुल संख्या 112 हो जाती है।

पेरम्बूर और त्रिची पूर्व से चुनाव लड़ रहे टीवीके प्रमुख को एक सीट से इस्तीफा देना होगा। इससे बहुमत का आंकड़ा घटकर 117 हो जाएगा और टीवीके की सीटों की संख्या 107 रह जाएगी।

एक नए राजनीतिक गठजोड़ में, कांग्रेस ने यहां अपनी विधायक दल की बैठक के बाद विजय की टीवीके को समर्थन देने की घोषणा की। साथ ही उसने द्रमुक से अलग होने की भी घोषणा की।

कांग्रस की तमिलनाडु इकाई के प्रभारी गिरीश चोडंकर ने एक बयान में कहा, ‘‘यह गठबंधन आपसी सम्मान, उचित हिस्सेदारी और दोनों पार्टियों के बीच साझा जिम्मेदारी पर आधारित है। यह न केवल इस सरकार के गठन के लिए है, बल्कि स्थानीय निकाय संगठनों, लोकसभा और राज्यसभा के भावी चुनावों के लिए भी है।’’

इस बीच, टीवीके सूत्रों ने कहा कि पार्टी द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के घटक दलों वीसीके, दो वामपंथी दलों और आईयूएमएल से समर्थन प्राप्त करने के लिए उत्सुक है। हालांकि, किसी ने भी टीवीके के साथ हाथ मिलाने के बारे में सकारात्मक संकेत नहीं दिए हैं, जिससे टीवीके के जल्द सरकार बनाने की संभावनाओं पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

वीसीके प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, ‘‘विजय ने हमारा समर्थन मांगा है। हम अपनी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों के विचार जानने के बाद फैसला करेंगे।’’ सूत्रों के अनुसार वीसीके विजय के समर्थन के अनुरोध पर निर्णय लेने के लिए सात मई को अपने पदाधिकारियों की बैठक बुलाएगी।

टीवीके सूत्रों के मुताबिक, विजय के सात मई को नेहरू इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है।

कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के भी समारोह में शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, राज्यपाल ने टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है, इसलिए बृहस्पतिवार को शपथ ग्रहण समारोह होने की संभावना कम है।

कांग्रेस द्वारा टीवीके को समर्थन देने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए द्रमुक प्रवक्ता सरवनन अनादुराई ने इसे ‘पीठ में छुरा घोंपना’ बताया।

उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ को बताया, ‘‘कांग्रेस पार्टी ने टीवीके के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है और उसे अपना समर्थन देने का वादा किया है। मुझे लगता है कि उन्होंने पीठ में छुरा घोंपा है… उन्होंने तमिलनाडु की जनता को धोखा दिया है। उन्होंने तमिलनाडु की जनता द्वारा दिए गए जनादेश को धोखा दिया है।’’

द्रमुक की तीखी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस के पवन खेड़ा ने कहा, ‘‘मैं आपको दिसंबर 2013 की याद दिलाना चाहूंगा, जब द्रमुक ने एक प्रेस वार्ता में घोषणा की थी कि वे लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेंगे।’’

खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘यह उनका लोकतांत्रिक अधिकार था, और उन्होंने ऐसा किया। क्या आपने उनसे पूछा कि यह पीठ में छुरा घोंपना था या नहीं? इसे पीठ में छुरा घोंपना नहीं कहा जा सकता।’’

भाषा संतोष माधव

माधव


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