बर्थडे स्पेशल -माला सिन्हा प्यासा से चमका सितारा
बर्थडे स्पेशल -माला सिन्हा प्यासा से चमका सितारा
पुराने जमाने की एक्ट्रैस माला सिन्हा आज 81 साल की हो गई हैं। उनका जन्म 11 नवंबर, 1936 को कोलकाता में हुआ था. बता दें कि अपने दौर में माला सिन्हा बहुत कामयाब एक्ट्रेस थीं. यह बात अलग है कि फीस के रूप में काफी मोटी रकम हासिल करने वाली माला स्वभाव से बेहद कंजूस थीं, इसलिए आयकर की अदायगी को लेकर चतुराई के चक्कर में एक बार वे बुरी तरह फंस गई थीं. बॉलीवुड में माला सिन्हा उन गिनी चुनी चंद अभिनेत्रियों में शुमार की जाती हैं जिनमें खूबसूरती के साथ बेहतरीन अभिनय का भी संगम देखने को मिलता है. वे अभिनेत्री नर्गिस से प्रभावित थीं और बचपन से ही उन्हीं की तरह अभिनेत्री बनने का ख्वाब देखा करती थीं। उनका बचपन का नाम आल्डा था और स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे उन्हें डालडा कहकर पुकारा करते थे. बाद में उन्होंने अपना नाम अल्बर्ट सिन्हा की जगह माला सिन्हा रख लिया।
स्कूल के एक नाटक में माला सिन्हा के अभिनय को देखकर बंगला फिल्मों के जाने-माने निर्देशक अर्धेन्दु बोस उनसे काफी प्रभावित हुए और उनसे अपनी फिल्म रोशनआरा में काम करने की पेशकश की। उस दौरान माला सिन्हा ने कई बंगला फिल्मों में काम किया। एक बार बंगला फिल्म की शूटिंग के सिलसिले में उन्हें मुंबई जाने का अवसर मिला। मुंबई में माला सिन्हा की मुलाकात केदार शर्मा से हुयी जो उन दिनो रंगीन रातें के निर्माण में व्यस्त थे. उन्हें माला सिन्हा को अपनी फिल्म के लिये चुन लिया। वर्ष 1954 में माला सिन्हा को प्रदीप कुमार के बादशाह हेमलेट जैसी फिल्मों में करने का मौका मिला लेकिन दुर्भाग्य से उनकी दोनों फिल्में टिकट खिड़की पर विफल साबित हुयी।
माला सिन्हा के अभिनय का सितारा निर्माता-निर्देशक गुरूदत्त की 1957 में प्रदर्शित क्लासिक फिल्म प्यासा से चमका। इस फिल्म की कामयाबी ने माला सिन्हा को स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। इस बीच माला सिन्हा ने राजकपूर के साथ परवरिश, फिर सुबह होगी, देवानंद के साथ लव मैरिज और शम्मी कपूर के साथ फिल्म उजाला में हल्के-फुल्के रोल कर अपनी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय दिया। वर्ष 1959 में प्रदर्शित बी.आर.चोपड़ा निर्मित फिल्म धूल का फूल के हिट होने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में माला सिन्हा के नाम के डंके बजने लगे और बाद में एक के बाद एक कठिन भूमिकाओं को निभाकर वह फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गयी। धूल का फूल निर्देशक के रूप में यश चोपड़ा की पहली फिल्म थी.
वर्ष 1961 में माला सिन्हा को एक बार फिर से बी.आर.चोपड़ा की ही फिल्म धर्मपुत्र में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुयी। इसके बाद 1963 में माला सिन्हा ने बी.आर.चोपड़ा की सुपरहिट फिल्म गुमराह में भी काम किया । माला सिन्हा ने अपने सिने करियर में उस दौर के सभी दिग्गज अभिनेताओं के साथ अभिनय किया। राजकपूर के साथ फिल्म परवरिश में भोला -भाला प्यार हो या फिर शम्मी कपूर के साथ फिल्म दिल तेरा दीवाना में मस्त अंदाज या फिर गुरूदत्त के साथ फिल्म प्यासा में संजीदा अभिनय या फिर में विश्वजीत के साथ दो कलियां में छैल.. छबीला रोमांस हो, माला सिन्हा हर अभिनेता के साथ उसी के रंग में रंग जाती थीं.महान अभिनेता दिलीप कुमार के साथ अभिनय करना किसी भी अभिनेत्री का सपना हो सकता है लेकिन माला सिन्हा ने उनके साथ फिल्म राम और श्याम में काम करने के लिये इसलिये इन्कार कर दिया कि वह फिल्म में अभिनय को प्राथमिकता देती थीं न कि शोपीस के रूप में काम करने को. माला सिन्हा के सिने करियर में उनकी जोड़ी अभिनेता धमेन्द्र के साथ खूब जमी। सबसे पहले यह जोड़ी 1962 में प्रदर्शित फिल्म अनपढ़ में पसंद की गयी. इसके बाद इस जोड़ी ने पूजा के फूल, जब याद किसी की आती है, नीला आकाश, बहारे फिर भी आयेगी और आंखे 1968 जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया। धर्मेन्द्र के अलावा उनकी जोड़ी विश्वजीत, प्रदीप कुमार और मनोज कुमार के साथ भी पसंद की गयी.खबरों की मानें तो एक बार उनके घर पर इनकम टैक्स वालों ने छापा मारा, जिसमें उनके बाथरूम की दीवार से 12 लाख रुपए बरामद हुए थे। इन पैसों को बचाने के लिए माला सिन्हा इस हद तक चली गई थीं कि उन्होंने कोर्ट में ये लिखकर दिया था कि उन्होंने ये पैसे फिजिकल रिलेशन बनाकर कमाए हैं.
आपको बता दें कि माला तब फिल्म इंडस्ट्री की बहुत चर्चित स्टार थीं. माला के लिए स्वयं को यूं पेश करना आसान कतई नहीं था. आखिरकार माला ने कोर्ट में वो बात कुबूल की जैसा करने को वकील ने कहा था। ऐसे में अदालत को आपत्ति नहीं हुई और माला को उनके पैसे लौटा दिए गए. ibc24 web team

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