Sneh Rana: Periods Pain के साथ मैदान में कैसे खेलती है महिला खिलाड़ी, स्नेह राणा का जवाब सुन हर कोई हुआ हैरान
मेंस्ट्रुअल साइकिल या शुद्ध हिंदी में कहें तो मासिक धर्म चक्र जिसे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में पीरियड्स कहा जाता है। इसी विषय पर हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा ने मीडिया से खुलकर बात की।
Image Source: Instagram / @sneh__rana94
- स्नेह राणा ने मासिक धर्म पर खुलकर बात की।
- स्नेह ने बताया पेनकिलर्स और हॉट पैड्स का सहारा।
- स्नेहा ने कहा जब मुझे पीरियड्स होते हैं तो मैं बहुत अच्छा परफॉर्म करती हूं
Sneh Rana: मेंस्ट्रुअल साइकिल या शुद्ध हिंदी में कहें तो मासिक धर्म चक्र जिसे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में पीरियड्स कहा जाता है। महिलाओं के शरीर का एक नेचुरल प्रोसेस हैं जिसके कारण महिलाओं के रोजमर्रा के कामों में भी काफी असर पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि महिला एथलीट्स इस शारीरिक चुनौती के बावजूद क्रिकेट, टेनिस और बैडमिंटन जैसे खेलों में अपना इतना अच्छा प्रदर्शन कैसे कर लेती हैं। इसी विषय पर हाल ही में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा ने मीडिया से खुलकर बात की।
महिला खिलाड़ी पीरियड पेन को कैसे संभालती हैं?
जब स्नेह राणा से पूछा गया कि मैच के दौरान अगर पीरियड्स हों तो वो इस हालत में कैसे मैनेज करती हैं खासकर जब क्रैम्प्स, मूड स्विंग्स और परफॉर्मेंस का दबाव एक साथ हो तो उन्होंने ईमानदारी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, ‘ये बहुत ज़रूरी विषय है, जिस पर बात होनी चाहिए क्योंकि बहुत से लोगों को इस बारे में जानकारी नहीं होती। मैं खुद बहुत तेज़ क्रैम्प्स झेलती हूं। जब मैच होते हैं तो हमें कई बार पेनकिलर जैसी दवाइयों का सहारा लेना पड़ता है।’
‘पीरियड्स में ज्यादा ज्यादा अच्छा परफॉर्म करती हूं’
वो आगे कहती हैं, ‘एक समय ऐसा भी आता है कि जब आपको बहुत ज्यादा दर्द हो रहा होता है लेकिन अगर आप अपने देश को रिप्रेजेंट कर रहे हैं या फिर आप डोमेस्टिक लेवल पर भी खेल रहे हैं तो भी आपको रुकना नहीं है। हां दिक्कते आती हैं लेकिन बतौर स्पोर्ट्स पर्सन आप मेंटली इतने स्ट्रॉन्ग हो जाते हैं इसलिए आपको पता होता है कि ये चीज तो आनी ही है। दूसरा तरीका है कि हम पीरियड्स के दौरान हॉट पैड्स अपने साथ रखते हैं। हम उन्हें ऑफ फील्ड यूज करते हैं लेकिन इसकी वजह से आपको रुकना नहीं चाहिए जो आप करना चाहते हैं। ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि पीरियड्स हैं तो खेलना नहीं है, मेरे साथ तो उल्टा है जब मुझे पीरियड्स होते हैं तो मैं बहुत अच्छा परफॉर्म करती हूं।’
स्नेह राणा की ये बात इस और इशारा करती है कि महिला खिलाड़ी किस तरह मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों के बावजूद मैदान पर पूरी हिम्मत और जज्बे के साथ डटी रहती हैं। ये न सिर्फ उनकी शारीरिक क्षमता को दिखाता है बल्कि इससे ये भी पता चलता है की वो मानसिक रूप से कितनी ताकतवर होती हैं।
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