पश्चिमी बाईपास परियोजना के पास नौकरशाहों के जमीन खरीदने की जांच हो : भ्रष्टाचार रोधी संगठन

पश्चिमी बाईपास परियोजना के पास नौकरशाहों के जमीन खरीदने की जांच हो : भ्रष्टाचार रोधी संगठन

पश्चिमी बाईपास परियोजना के पास नौकरशाहों के जमीन खरीदने की जांच हो : भ्रष्टाचार रोधी संगठन
Modified Date: May 17, 2026 / 06:15 pm IST
Published Date: May 17, 2026 6:15 pm IST

भोपाल, 17 मई (भाषा) मध्यप्रदेश में काम करने वाले एक भ्रष्टाचार रोधी संगठन ने 3,200 करोड़ रुपये की लागत वाले प्रस्तावित भोपाल पश्चिमी बाईपास से जुड़े भूमि सौदों की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने परियोजना की मंजूरी से महीनों पहले ही मार्ग पर भूखंड खरीद लिए थे।

संगठन के आरोपों के मुताबिक, कुछ ही वर्षों में अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन की कीमतें आसमान छूने लगीं।

‘सिस्टम परिवर्तन अभियान’ (एसपीए) नामक संगठन ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर 35 किलोमीटर लंबाई वाली परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग की है।

एसपीए ने दावा किया है कि इस परियोजना में तीन बार बदलाव किया गया, लेकिन इसके बावजूद नौकरशाहों को फायदा मिल रहा है।

संगठन के अध्यक्ष आजाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि बाईपास परियोजना का इस्तेमाल वरिष्ठ अधिकारियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी डबास ने कहा, ‘‘भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारा अभियान प्रशासनिक, न्यायिक, पुलिस और मीडिया की जवाबदेही के लिए एक अभियान है।’’

एसपीए ने मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए दावा किया कि विभिन्न राज्यों के लगभग 50 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों ने 4 अप्रैल, 2022 को रजिस्ट्री दस्तावेज के माध्यम से भोपाल के कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में 2.023 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदी।

संगठन ने आरोप लगाया है कि जमीन 5.5 करोड़ रुपये में खरीदी गई थी जबकि उस समय इसका बाजार मूल्य 7.78 करोड़ रुपये था। इसने कहा कि इस भूमि खरीद के लगभग 16 महीने बाद 35 किलोमीटर लंबी पश्चिमी बाईपास परियोजना के लिए 31 अगस्त, 2023 को मंजूरी दी गई थी।

डबास ने आरोप लगाया कि इसके बाद, जून 2024 में भूमि उपयोग को कृषि से आवासीय में बदल दिया गया।

एसपीए के अनुसार, जमीन का मूल्य 2022 में लगभग 5.5 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्तमान में 55-60 करोड़ रुपये हो गया है।

डबास ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए सड़क परियोजना का निर्माण अनावश्यक रूप से किया जा रहा है। राज्य के हित में पश्चिमी बाईपास पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।’’

संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि ‘बाईपास एलाइनमेंट’ को तीन बार बदला गया लेकिन अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन के पास से रास्ता गुजरता रहा।

डबास ने यह भी दावा किया कि 2013 से 2016 बैच के कई अधिकारियों ने कथित तौर पर अपनी पत्नियों और बच्चों के नाम पर जमीन खरीदी शुरू की और कुछ ने भोपाल में नियमों का उल्लंघन करते हुए इमारतों का निर्माण किया।

संगठन ने भूमि सौदों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और सरकार से ‘सार्वजनिक धन के अनावश्यक खर्च’ को रोकने के लिए पश्चिमी बाईपास परियोजना को रद्द करने का आग्रह किया है।

भाषा ब्रजेन्द्र नेत्रपाल नरेश

नरेश


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