Educated youth hurt by not getting employment opened berojgar biryani wala
बड़वानी। इस वक्त देश में बेरोजगारी की समस्या चरम पर है। इसके साथ ही व्यापम पटवारी भर्ती आदि घोटाले सरकार और व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं कई पढ़े लिखे युवाओं ने तो नौकरी की आस छोड़कर अपने अलग व्यवसाय शुरू कर दिये है। ऐसा ही एक युवक है ग्राम गांवाड़ी का रहने वाला जिसने खुद का चिकन बिरयानी सेंटर खोल दिया और नाम भी ‘बेरोजगार चिकन बिरयानी’ सेंटर रखा है।
सेंधवा के समीप ग्राम गवाडी का रहने वाला रितेश पिता सोहनसिह आर्य ने बताया की उसने बैचलर एवं डीएलएड किया है। मेरे पिता शिक्षक थे, जिनका 2017 देहांत हो गया। पिता की जगह अनुकंपा के लिए दर दर भटका फिर भी नहीं मिली अनुकंपा परिवार में मां , दो भाई एक बहन है परिवार का पालन पोषण नहीं हो पा रहा था। रोजगार की तलाश में गवाडी में अथिति शिक्षक के रूप में 2 साल कार्य किया। वहां फिर शिक्षक की भर्ती होने से मुझे हटा दिया गया। पटवारी व शिक्षक भर्ती में प्रयास किया परंतु चयन नहीं हुआ। फिर दर दर की ठोकर खाकर आहत हुआ और ब्याज से दस हजार रुपये उधार लेकर अब बेरोजगार चिकन बिरयानी सेंटर खोला, जिससे परिवार का पालन पोषण हो सके।
खैर युवक ने अगर अपना खुद का व्यवसाय किया तो यह गलत भी नहीं है, लेकिन अगर पढ़ा-लिखा युवक नौकरी नहीं मिलने से आहत होकर बेरोजगार चिकन सेंटर खोलता है। ऐसे में सवाल सरकार से है कि आखिर पढ़ाई लिखाई स्पेशल कोर्स का करने का क्या फायदा..?