भोजशाला विवाद : एएसआई की रिपोर्ट से हिंदू पक्ष उत्साहित, मुस्लिम समुदाय ने जताई आपत्ति

भोजशाला विवाद : एएसआई की रिपोर्ट से हिंदू पक्ष उत्साहित, मुस्लिम समुदाय ने जताई आपत्ति

भोजशाला विवाद : एएसआई की रिपोर्ट से हिंदू पक्ष उत्साहित, मुस्लिम समुदाय ने जताई आपत्ति
Modified Date: February 24, 2026 / 06:34 pm IST
Published Date: February 24, 2026 6:34 pm IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 24 फरवरी (भाषा) धार के विवादित भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के खुलासे के बाद इस ऐतिहासिक स्मारक के बहुचर्चित मसले ने नया मोड़ ले लिया है।

पक्षकारों के मुताबिक एएसआई की 2,000 से ज्यादा पन्नों की इस सर्वेक्षण रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि विवादित स्थल पर धार के परमार राजाओं के शासनकाल की एक विशाल संरचना पहले से विद्यमान थी और वहां वर्तमान में मौजूद संरचना प्राचीन मंदिरों के हिस्सों से बनाई गई थी।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने इस रिपोर्ट पर सोमवार को सभी पक्षकारों को दो हफ्तों के भीतर अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और सिफारिशें पेश करने को कहा और अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की।

भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष संभवतः 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर एएसआई द्वारा संरक्षित है और इस निकाय ने उच्च न्यायालय के आदेश पर दो साल पहले विवादित परिसर का सर्वेक्षण करके अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट को लेकर अदालत के ताजा आदेश के बाद इस विवादित स्थल का मसला फिर सुर्खियों में आ गया है।

पक्षकारों के मुताबिक 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया,‘‘प्राप्त स्थापत्य अवशेषों, मूर्तिकला के टुकड़ों, साहित्यिक ग्रंथों वाले शिलालेखों की बड़ी शिलाओं, स्तंभों पर नागकर्णिका शिलालेख आदि से संकेत मिलता है कि इस स्थल पर साहित्यिक और शैक्षिक गतिविधियों से संबंधित एक विशाल संरचना विद्यमान थी। वैज्ञानिक जांच के दौरान प्राप्त पुरातात्विक अवशेषों के आधार पर पहले से मौजूद इस संरचना को परमार काल का माना जा सकता है।’’

पक्षकारों के मुताबिक विस्तृत रिपोर्ट में यह भी कहा गया,‘‘वैज्ञानिक जांच, सर्वेक्षण और पुरातात्विक उत्खनन, प्राप्त वस्तुओं के अध्ययन एवं विश्लेषण, स्थापत्य अवशेषों, मूर्तियों और शिलालेखों के अध्ययन, कला और मूर्तिकला के आधार पर कहा जा सकता है कि वर्तमान संरचना प्राचीन मंदिरों के भागों से बनाई गई थी।’

याचिकाकर्ताओं में शामिल ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के पक्षकार आशीष गोयल ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘उच्च न्यायालय में विचाराधीन हमारी याचिका की मुख्य गुहार है कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप तय किया जाए। एएसआई की रिपोर्ट से हमारी इस बात को बल मिलता है कि भोजशाला एक परमारकालीन स्मारक है और इसे नुकसान पहुंचाकर एक नया ढांचा खड़ा किया गया था।’’

उन्होंने दावा किया कि एएसआई को वैज्ञानिक सर्वेक्षण में मिले सिक्के, मूर्तियां और शिलालेख दर्शाते हैं कि विवादित परिसर पर एक प्राचीन मंदिर था।

उधर, मुस्लिम समुदाय ने एएसआई की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। मुस्लिम पक्ष के याचिकाकर्ताओं में शामिल मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी से जुड़े अब्दुल समद ने कहा,’एएसआई की रिपोर्ट को लेकर हम उच्च न्यायालय के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराएंगे।’

उन्होंने दावा किया कि एएसआई ने उनकी पुरानी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए विवादित परिसर में ‘‘पीछे के रास्ते से रखी गईं चीजों’’ को भी सर्वेक्षण में शामिल किया।

धार के ऐतिहासिक परिसर को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार अब तक चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को इस परिसर में प्रत्येक मंगलवार पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार वहां नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट में विवादित परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों और धार्मिक प्रतीक चिन्हों से लेकर संस्कृत, प्राकृत, अरबी और फारसी में उत्कीर्ण शिलालेखों की मौजूदगी का जिक्र किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस परिसर की मौजूदा संरचना बेसाल्ट की पहले से मौजूद संरचना के ऊपर निर्मित है जिसका निचला भाग अब भी वर्तमान संरचना के आधार के रूप में मौजूद है।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि विवादित परिसर में संस्कृत और प्राकृत के सभी शिलालेख अरबी और फारसी के शिलालेखों से पहले के हैं जो दर्शाते हैं कि संस्कृत और प्राकृत के शिलालेखों का उपयोग करने वाले लोग या इन्हें उत्कीर्ण करने वाले व्यक्ति इस स्थान पर पहले से ही मौजूद थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, परिसर की वर्तमान संरचना के अंदर और आस-पास की जांच के दौरान अलग-अलग काल खंडों के कुल 31 सिक्के मिले और इनमें शामिल सबसे पुराने सिक्कों को 10वीं-11वीं शताब्दी का माना जा सकता है, जब मालवा अंचल पर परमार राजाओं का शासन था और उनकी राजधानी धार थी।

रिपोर्ट में कहा गया कि सर्वेक्षण के दौरान कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिकला के टुकड़े और मूर्तिकला से सजे स्थापत्य तत्व पाए गए जो बेसाल्ट, संगमरमर, मृदु पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से बने हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर और कमाल मौला के मकबरे में अरबी और फारसी के 56 शिलालेख भी मिले जिनमें मकबरे में रखीं शिलाएं और स्याही से लिखे 43 शिलालेख शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि स्याही से लिखे शिलालेखों में मुख्य रूप से आगंतुकों का विवरण है, जबकि कुछ में इस्लामी मत, प्रार्थना और धार्मिक ग्रंथों के अंशों के साथ ही संबंधित व्यक्तियों के नामों के साथ फारसी पद्यांश चित्रित हैं।

भाषा हर्ष शफीक

शफीक


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