Face To Face Madhya Pradesh: चुनावी संग्राम बनी धर्म और अधर्म की लड़ाई.. मौजूदा सियासत पर क्या आपने सुना रामभद्राचार्य के बयान? देखे स्टोरी..
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Face To Face Madhya Pradesh: भोपाल: नमस्कार आप देख रहे हैं मध्यप्रदेश का नंबर वन डिबेट शो फेस-टू-फेस-मध्यप्रदेश। ‘धर्म: कामदुधा सदा सुखकरी… संजीवनी चौषधि’.. अर्थात धर्म कल्पतरु यानी सारी इच्छाओं की पूर्ति करने वाले वृक्ष.. विष हरने वाली मणि… और चिंतामणि रत्न है। धर्म सदा सुख देने वाली कामधेनु है.. और संजीवनी औषधि है। लेकिन जब बात सियासत में धर्म और अधर्म की हो, तो सारे वेद-पुराण और ज्ञान की गठरी किनारे हो जाते हैं… सब कुछ जीत-हार पर केंद्रित हो जाती है। MP की सियासत में क्या है धर्म और क्या है अधर्म..? क्यों शिवराज और कमलनाथ के बीच की चुनावी लड़ाई धर्मयुद्ध में बदल गई है..? बहस करेंगे इस मुद्दे पर और हमारे साथ दो गेस्ट भी होंगे। लेकिन पहले देखिए ये रिपोर्ट।
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तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने सिवनी में राम कथा के दौरान धर्म और अधर्म को लेकर ये बातें कहीं। शिवराज और कमलनाथ की चुनावी लड़ाई को धर्म और अधर्म से जोड़ने के इस बयान से MP की सियासत में उबाल आ गया। दिलचस्प तो ये है कि किसी भी राजनीतिक दल ने स्वामी रामभद्राचार्य के बयान का विरोध नहीं किया, बल्कि कांग्रेस और भाजपा… दोनों में ही ये जताने की होड़ मच गई कि धर्म उनके साथ है। बीजेपी ने तो साफ कह दिया कि वे 18 सालों से धर्म का पालन कर रहे हैं। स्वामी का आशीर्वाद उनके साथ है।
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कांग्रेस ने आरोपों की झड़ी लगाते हुए सवाल उठाया कि जिन्होंने निजी खर्च से मंदिर बनवाने वाले धर्मी हैं या फिर अधर्मी… वहीं महाकाल लोक का पैसा खाने वाले धर्मी हैं या अधर्मी, इसका फैसला जनता को करना है।
धर्म ध्वजवाहक स्वामी रामभद्राचार्य को आखिर क्यों व्यासपीठ से कहना पड़ा… कि MP में लड़ाई कमलनाथ और शिवराज के बीच नहीं… बल्कि धर्म-अधर्म के बीच है? तो सवाल ये है और सियासी लड़ाई अब इस बात की है कि… चुनावी जीत-हार के पहले… जनता-जनार्दन के सामने कौन, किसे, कितना अधर्मी साबित कर दे..?

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