गैस त्रासदी के प्रभावितों में सामान्य लोगों की तुलना में कैंसर की दर लगभग 13 गुना ज़्यादा
गैस त्रासदी के प्रभावितों में सामान्य लोगों की तुलना में कैंसर की दर लगभग 13 गुना ज़्यादा
भोपाल, चार फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 1984 में हुई गैस त्रासदी के प्रभावितों में सामान्य लोगों की तुलना में कैंसर होने की दर लगभग 13 गुना ज़्यादा है।
गैस पीड़ितों के हक में काम करने वाले ‘संभावना ट्रस्ट क्लीनिक’ ने विश्व कैंसर दिवस पर यहां प्रेसवार्ता में यह आंकड़ा जारी किया।
साल 1996 में स्थापित ‘सम्भावना ट्रस्ट क्लीनिक’ यहां यूनियन कार्बाइड हादसे के पीड़ितों को मुफ्त इलाज भी मुहैया कराता है।
भोपाल में दो और तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से अत्यधिक जहरीली मिथाइल आइसोसाइनेट गैस का रिसाव हुआ था। इससे कम से कम 5,479 लोग मारे गए थे और हजारों लोग अपंग हो गए थे।
क्लीनिक के सदस्यों ने बताया, ‘‘1984 के यूनियन कार्बाइड हादसे से प्रभावित आबादी में कैंसर की दर, गैर पीड़ित आबादी की तुलना में लगभग 13 गुना ज़्यादा है।’’
उन्होंने कहा कि आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि गैस पीड़ित महिलाओं की अपेक्षा गैस पीड़ित पुरुषों में कैंसर की दर ज़्यादा है।
उन्होंने कहा कि यह भी देखा गया है कि गैस पीड़ित आबादी में खून, फेफड़े और गले के कैंसर की दर सबसे ज़्यादा है।
क्लीनिक की सामुदायिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण यूनिट के सदस्य राधे लाल नापित ने कहा, “हमने 21276 गैस पीड़ितों और 25528 गैर गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी इकट्ठा की है।’
क्लीनिक की एक अन्य सदस्य ने कहा कि आंकड़े दिखाते हैं कि गैस पीड़ित आबादी में कैंसर की दर प्रति 100,000 पर 1569.84 है, वहीं गैर पीड़ित आबादी में यह प्रति 100,000 पर 117.52 है।
उन्होंने कहा, ‘गैस पीड़ित पुरुषों में कैंसर की दर 14.92 गुना ज़्यादा है, जबकि गैस पीड़ित महिलाओ में यह 12.22 गुना ज़्यादा है।”
भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार
राजकुमार

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