इंदौर में दूषित जल से लोगों की मौत शहरी नियोजन की विफलता का ‘घातक परिणाम’ : दिग्विजय

इंदौर में दूषित जल से लोगों की मौत शहरी नियोजन की विफलता का 'घातक परिणाम' : दिग्विजय

इंदौर में दूषित जल से लोगों की मौत शहरी नियोजन की विफलता का ‘घातक परिणाम’ : दिग्विजय
Modified Date: January 11, 2026 / 10:32 am IST
Published Date: January 11, 2026 10:32 am IST

भोपाल, 11 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इंदौर में दूषित जल से लोगों की मौत को शहरी नियोजन की विफलता का ‘घातक परिणाम’ करार दिया और कहा कि जब तक ‘व्यवस्था’ की नसों में मिले हुए सीवेज और पेयजल को अलग नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी त्रासदियां बार-बार होती रहेंगी।

इंदौर के भागीरथपुरा में पिछले दिनों दूषित पानी पीने के कारण डायरिया के प्रकोप से कई लोगों की मौत हो गई थी।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस प्रकोप से अब तक छह लोगों की मौत हुई है, जबकि स्थानीय लोगों ने 17 लोगों की मौत का दावा किया है। इस बीच, इंदौर कलेक्टर ने 18 पीड़ित परिवारों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा वितरित किया है।

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राज्यसभा सदस्य सिंह ने दैनिक समाचार पत्र में लिखे एक आलेख में इस त्रासदी में 20 से अधिक लोगों की मौत का दावा करते हुए कहा जिन जिदगियों को दूषित पानी ने निगल लिया, उन्हें न तो लौटाया जा सकता है और न ही किसी मुआवजे से परिजनों का दुख कम किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, ‘हां, एक काम अवश्य किया जा सकता है। यह पता लगाया जाए कि लापरवाही और भ्रष्टाचार का सीवेज जिम्मेदारी, नैतिकता और उत्तरदायित्व की स्वच्छ जल व्यवस्था में कब और कैसे मिल गया।’

उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय तलाशने पर जोर दिया और कहा यह केवल एक राजनीतिक दायित्व नहीं, बल्कि एक नागरिक कर्तव्य भी है।

‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर सस्टेनिबिलिटी’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए सिंह ने कहा कि भारत का लगभग 70 प्रतिशत पानी दूषित हो चुका है।

सिंह ने कहा कि यदि भारत के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा कई बार हासिल कर चुके इंदौर में दूषित पानी से लोगों की जान जा सकती है तो यह मानना कठिन नहीं कि दूरस्थ और वंचित अंचलों में ऐसी मौतें अनदेखी रह जाती होंगी।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में घटते रोजगार, पलायन और तेज शहरीकरण के दबाव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘यह समस्या केवल पाइपलाइन बिछाने से हल नहीं होगी। इसके लिए अवैध बस्तियों पर नियंत्रण, सीवेज और पेयजल लाइनों का स्पष्ट पृथक्करण तथा हर दस वर्ष में नया मास्टर प्लान अनिवार्य है।’

उन्होंने कहा ठेकेदार-केंद्रित सोच से हटकर नागरिक-केंद्रित व्यवस्था बनाए जाने का समर्थन करते हुए कहा, ‘जब तक व्यवस्था की नसों में मिले हुए सीवेज और पेयजल को अलग नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी त्रासदियां हमें बार-बार चेतावनी देती रहेंगी।’

भाषा ब्रजेन्द्र सुरभि जोहेब

जोहेब


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