भोपाल, नौ सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में पद बढ़ाने की मांग को लेकर राज्य की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में पिछले करीब 20 दिन से आंदोलन कर रहे शिक्षक अभ्यर्थियों ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनके पक्ष में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो वे आंदोलन को और तेज तथा व्यापक करेंगे।
मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए ये अभ्यर्थी जहांगीराबाद इलाके में स्थित नीलम पार्क में आंदोलन कर रहे हैं। उनकी मुख्य मांग माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के पदों की संख्या बढ़ाने की है।
आंदोलनकारी शैलेंद्र रावत ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं, इसके बावजूद शिक्षक भर्ती-2025 में अपेक्षाकृत कम पदों पर भर्ती निकाली गई।
उन्होंने कहा कि सरकार ने 2025 में प्राथमिक शिक्षकों के 13,089 पदों पर भर्ती निकाली थी और पहले परामर्श सत्र के बाद केवल 6,800 पदों पर नियुक्तियां की गईं।
रावत ने कहा कि जब शिक्षकों के इतने पद खाली हैं तो सरकार को दूसरे परामर्श सत्र के जरिए रिक्त पदों को भरना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई अभ्यर्थी शिक्षक भर्ती के लिए निर्धारित अधिकतम उम्र सीमा पार करने के करीब हैं और इसके बाद वे अगली भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने के पात्र नहीं रहेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए अधिकतम उम्र सीमा 35 वर्ष निर्धारित है।
रावत ने कहा कि प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की मांग है कि प्राथमिक शिक्षकों के 13,089 पदों की संख्या बढ़ाकर 25,000 की जाए।
उन्होंने कहा कि इसी तरह माध्यमिक शिक्षकों के लिए खेल, संगीत, नृत्य, गायन और वादन समेत सभी विषयों में कम से कम 3,000 अतिरिक्त पद स्वीकृत किए जाएं।
उन्होंने कहा कि इससे स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के साथ ही पात्र अभ्यर्थियों को रोजगार भी मिल सकेगा।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों में अधिकांश अतिथि शिक्षक हैं, जो राज्य के विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं।
प्रदेश के राजकीय स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उच्च माध्यमिक स्तर पर 18,000 रुपये, माध्यमिक स्तर पर 14,000 रुपये और प्राथमिक स्तर पर 10,000 रुपये का मानदेय मिलता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि इतने दिनों से आंदोलन जारी है, लेकिन सरकार की ओर से कोई अधिकारी, मंत्री या उनका प्रतिनिधि बातचीत करने नहीं आया है।
सागर के अभ्यर्थी मोहन तिवारी ने सरकार पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो उनका आंदोलन और तेज तथा व्यापक होगा।
आंदोलन स्थल पर मौजूद अशोकनगर जिले के मूंगावली निवासी अतिथि शिक्षक प्रदीप प्रेम साहू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह 30 वर्ष के हो चुके हैं और उनकी शादी इसलिए नहीं हुई है क्योंकि उनके पास स्थायी नौकरी नहीं है।
उन्होंने कहा, “नौकरी मिलेगी तो ही शादी होगी…।’’
कटनी के नागेंद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने 2025 की प्राथमिक शिक्षक भर्ती में गणित शिक्षक के पद के लिए आवेदन किया था और परिणाम आने पर उनका नाम प्रतीक्षा सूची में छठे स्थान पर था।
उन्होंने कहा कि यदि पद बढ़ाए जाते हैं तो उन्हें आसानी से नौकरी मिल सकती है। संस्कृत के अतिथि शिक्षक लक्ष्मण सिंह लोधी ( 31) की भी कुछ ऐसी ही कहानी है।
उन्होंने कहा कि 2025 की भर्ती में पूरे राज्य में प्राथमिक स्तर पर संस्कृत शिक्षकों के केवल सात पद थे और वह प्रतीक्षा सूची में दूसरे स्थान पर रह गए।
आंदोलन के शुरुआती दिनों में कुछ अभ्यर्थियों ने आमरण अनशन भी किया था, लेकिन उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए सरकार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
इसके बाद सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि परिणाम घोषित होने के बाद पदों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती और अभ्यर्थियों की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है।
हालांकि, अभ्यर्थियों ने दावा किया कि 2020 और 2022 में परिणाम घोषित होने के बाद भी सरकार ने पदों की संख्या बढ़ाई थी।
अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2023 में 8,720 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। पहले परामर्श सत्र में 2,901 पदों पर नियुक्तियां हुईं, जबकि 5,819 पदों के लिए अब तक परामर्श सत्र आयोजित नहीं हुआ है।
अभ्यर्थियों के अनुसार, 27 दिसंबर 2024 की स्थिति में स्कूल शिक्षा विभाग में माध्यमिक शिक्षकों के 99,197 और प्राथमिक शिक्षकों के 1,31,152 पद रिक्त हैं। उनके मुताबिक, जनजातीय कार्य विभाग में माध्यमिक शिक्षकों के 43,734 और प्राथमिक शिक्षकों के 54,625 पद खाली हैं।
अभ्यर्थियों का दावा है कि इन रिक्तियों के बावजूद मौजूदा भर्ती में माध्यमिक शिक्षकों के केवल 10,800 और प्राथमिक शिक्षकों के 13,089 पदों पर भर्ती प्रक्रिया की जा रही है।
पिछले दिनों कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया था।
भाषा ब्रजेन्द्र खारी
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