मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने पांच गिद्धों को जंगल में छोड़ा, वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता जताई

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने पांच गिद्धों को जंगल में छोड़ा, वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता जताई

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने पांच गिद्धों को जंगल में छोड़ा, वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता जताई
Modified Date: February 24, 2026 / 02:12 pm IST
Published Date: February 24, 2026 2:12 pm IST

भोपाल, 24 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भोपाल के पास हलाली बांध क्षेत्र में पांच लुप्तप्राय गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा और पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देने वाले वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर प्रतिबद्धता जताई।

एक अधिकारी ने बताया कि देश में गिद्धों की सर्वाधिक संख्या मध्यप्रदेश में पाई जाती है, जिनमें प्रवासी गिद्ध भी शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि ये पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अधिकारी के अनुसार, हलाली बांध क्षेत्र में जिन पांच लुप्तप्राय गिद्धों को प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है, उनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री यादव ने कहा, ‘‘पारिस्थितिकी तंत्र में सहयोगी पशु-पक्षियों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। मध्यप्रदेश जहां बाघ, तेंदुआ और अन्य वन्य प्राणियों की सर्वाधिक संख्या वाला राज्य है, वहीं गिद्ध संरक्षण में भी देश में प्रथम है।’’

मुख्यमंत्री ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को गिद्ध संरक्षण के प्रयासों के लिए बधाई दी।

अधिकारी ने बताया कि बेहद सटीक परिणाम वाले ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस)-ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशन (जीएसएम) उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पांच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया गया।

उन्होंने कहा कि टैगिंग की प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘वाइल्डलाइफ एसओएस’ के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देखरेख में संपन्न हुई।

अधिकारी ने बताया कि यह पहल मध्य भारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने कहा, ‘‘जहां भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई ‘फ्लाई-वे’ के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है।’’

उन्होंने बताया कि पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश के वन विभाग ने ‘डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया’ और ‘बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी’ के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों की निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम शुरू किया है।

उन्होंने कहा कि टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भू-दृश्य उपयोग, आवागमन रुझान और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

अधिकारी ने बताया कि इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान करने, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में एकत्रित वैज्ञानिक प्रमाण खतरा-निवारण संबंधी अधिक प्रभावी रणनीतियां तैयार करने और सीमा-पार सहयोग सहित भू-दृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे।

अधिकारी ने बताया कि मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री की मदद से गिद्धों की सुरक्षा के लिए डेटा पर आधारित और बड़े क्षेत्र स्तर पर काम करने वाली एक एकीकृत संरक्षण व्यवस्था तैयार की गई है।

अधिकारी ने कहा कि इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरण की सेहत के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका लंबे समय तक बनी रहेगी।

भाषा ब्रजेन्द्र खारी

खारी


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