मप्र : इंदौर दूषित पेयजल मामले में मुख्य सचिव को 15 जनवरी को पेश होने के निर्देश
मप्र : इंदौर दूषित पेयजल मामले में मुख्य सचिव को 15 जनवरी को पेश होने के निर्देश
इंदौर, छह जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति से हुई मौतों और बीमारी के मामलों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को राज्य के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने के निर्देश दिए।
उच्च न्यायालय ने इस पूरे मामले पर राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया को “असंवेदनशील” करार दिया। यह जानकारी याचिकाकर्ताओं में शामिल उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इनानी ने दी।
न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने चार-पांच याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। इनानी ने संवाददाताओं से कहा कि सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार द्वारा दाखिल जवाब पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस घटना से न केवल जनविश्वास को ठेस पहुंची है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर की छवि भी प्रभावित हुई है।
अदालत ने केंद्र सरकार के वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार शीर्ष स्थान मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वच्छता के लिए पहचाने जाने वाले शहर में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
इनानी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा मौतों की संख्या को लेकर प्रस्तुत स्थिति रिपोर्ट पर भी कड़ा रुख अपनाया और पूरे प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताया।
उन्होंने कहा कि अदालत यह भी जांच करेगी कि इस मामले में आपराधिक दायित्व बनता है या दीवानी दायित्व।
इनानी ने बताया कि मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को 15 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च न्यायालय के समक्ष उपस्थित रहना होगा।
इस बीच, भागीरथपुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सोमवार को दूषित पेयजल से जुड़े उल्टी-दस्त के 38 नए मामले सामने आए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस घटना में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि छह मरीजों को अस्पतालों में रेफर किया गया है, जबकि 110 मरीज विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जिनमें 15 की हालत गंभीर है और वे आईसीयू में भर्ती हैं।
भाषा
सं, दिमो रवि कांत

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