मध्यप्रदेश: यूसीसी विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप देने को लेकर समिति ने किया विचार-विमर्श
मध्यप्रदेश: यूसीसी विधेयक के मसौदे को अंतिम रूप देने को लेकर समिति ने किया विचार-विमर्श
भोपाल, 22 जून (भाषा) मध्यप्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने राजधानी भोपाल में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, धर्मगुरुओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न आयोगों के सदस्यों समेत विभिन्न हितधारकों के मौखिक व लिखित सुझाव लिए।
भोपाल में स्थित नरोन्हा प्रशासन अकादमी में सुबह से शाम तक बैठकों का दौर जारी रहा, जिसका उद्देश्य यूसीसी के मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले सभी वर्गों और हितधारकों की राय लेना था।
बैठक में व्यक्तियों, संस्थाओं, शासकीय विभागों, राजनीतिक दल, धर्म गुरुओं और विभिन्न आयोगों के प्रतिनिधियों ने अपनी राय रखी।
इस उच्च स्तरीय समिति के सदस्य और उत्तराखंड के सेवानिवृत मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, शिक्षाविद गोपाल शर्मा और डॉ शोभा वेथनकर, वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप नायर, समाजसेवी बुद्ध पाल सिंह ने सभी के सुझाव सुनें।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि शासन की ओर से सभी मौखिक और लिखित सुझावों को दर्ज किया गया।
इसमें कहा गया है, ‘सुझावों में प्रमुख रूप से विवाह, विवाह विच्छेद, संतान, दत्तक नियम जैसे विभिन्न विषयों पर राय दी गई।’
बयान के मुताबिक समिति के समक्ष जनजाति कार्य विभाग, गृह, महिला एवं बाल विकास, राजस्व, शिक्षा, लोक स्वास्थ्य,जेल विभाग ने प्रस्तुति दी।
बयान के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पदाधिकारियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए और बाद में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख और बौद्ध धर्म गुरुओं ने भी समिति के समक्ष अपने सुझाव रखे।
इसके अनुसार, बाद में समिति ने भोपाल जिले के जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की राय जानी।
यूसीसी मसौदा समिति के सदस्य और उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने पीटीआई वीडियो से बातचीत के दौरान कहा कि विधेयक का प्रारूप लागू करने के पहले समाज के विभिन्न वर्गों के विचारों को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए बनाई गई वेबसाइट पर लोगों ने लाखों की संख्या में अपनी सुझाव रखे हैं और इसी क्रम में सोमवार की बैठक आयोजित की गई है।
उन्होंने कहा कि सोमवार की बैठक में सीधे ‘फैमिली लॉ’ से जुड़े मामलों में काम करने वाले बहुत से आयोगों के साथ विचार विमर्श किया गया और साथ ही विभागीय अधिकारियों से भी चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों और धर्म गुरुओं से भी बात की गई और सभी के विचारों का मंथन कर यूसीसी विधेयक को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सिंह ने कहा कि अनुसूचित जनजाति को लेकर भी कई सुझाव सामने आए और उनमें सबसे प्रमुख था कि उन्हें इसके दायरे से बाहर रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस बारे में और भी बहुत सारे सुझाव सामने आए।
पीटीआई वीडियो से बातचीत के दौरान कुछ धर्मगुरुओं ने ‘लिव इन रिलेशनशिप’ का विरोध किया और इस संबंध में अपने पक्ष रखें।
भोपाल शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने कहा कि यूसीसी के माध्यम से मुस्लिम पर्सनल लॉ में छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए जबकि आर्च बिशप दुरई राज ने कहा सभी धर्मों का सम्मान बरकरार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी सभी समाजों से जुड़ें हैं और उन्हें एक धर्म या जाति से नहीं जोड़ना चाहिए।
इस बीच, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक बयान में कहा कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की चर्चा राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार का एक राजनीतिक एजेंडा है, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान प्रदेश के वास्तविक और गंभीर मुद्दों से भटकाना है।
उन्होंने कहा, ‘आज मध्यप्रदेश का युवा बेरोजगारी से परेशान है, महंगाई लगातार बढ़ रही है, किसान संकट में हैं और आदिवासी समाज अपने अधिकारों एवं सुरक्षा को लेकर चिंतित है। ऐसे समय में भाजपा सरकार जनता के मूल मुद्दों पर जवाब देने के बजाय यूसीसी जैसे विषयों को आगे बढ़ाकर राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास कर रही है।’
उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सवाल किया कि आदिवासी समाज के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई गारंटियां कब पूरी होंगी? आदिवासी क्षेत्रों में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के जो वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ?
पटवारी ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी बहनों के लापता होने, उनके साथ अत्याचार और उत्पीड़न की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
उन्होंने सवाल किया, ‘सरकार बताए कि इन बहनों की सुरक्षा और न्याय की गारंटी कौन देगा? भाजपा सरकार इन मामलों में जवाबदेही तय करने में क्यों विफल रही है?’
पटवारी ने कहा कि यदि यूसीसी वास्तव में इतना ही आवश्यक है, तो सरकार स्पष्ट करे कि इससे आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक पहचान और संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष अधिकारों की सुरक्षा किस प्रकार सुनिश्चित की जाएगी। सरकार को आदिवासी समाज की आशंकाओं का स्पष्ट उत्तर देना चाहिए।
उन्होंने कहा, “यूसीसी को राज्यों में लागू करने की चर्चा जनता का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक संकट और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से हटाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। भाजपा सरकार को प्रचार और भ्रम फैलाने के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि यूसीसी को लेकर सुझाव देने का सोमवार अंतिम दिन था। मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार इस विधेयक को पेश करने की तैयारी कर रही है।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कुछ दिन पहले कहा था कि राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के लिए विधानसभा के मानसून सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा और बाबा महाकाल के आशीर्वाद से यह इसी सत्र में पारित होगा।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से होगी।
भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
जोहेब

Facebook


