मप्र : इंदौर दूषित जल मामले में कांग्रेस ने विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की
मप्र : इंदौर दूषित जल मामले में कांग्रेस ने विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की
इंदौर (मध्यप्रदेश), छह जनवरी (भाषा) कांग्रेस ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से बीमार हुए लोगों के परिवारों से मंगलवार को मुलाकात की और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मृतकों की वास्तविक संख्या छिपाने का आरोप लगाया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस दौरान राज्य के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे और इंदौर के प्रभारी मंत्री के नाते मुख्यमंत्री मोहन यादव से घटना के लिए माफी की मांग की।
प्रशासन ने शहर में दूषित पानी पीने से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप में अब तक छह लोगों की मौत की पुष्टि की है। हालांकि, महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दो जनवरी को कहा था कि उन्हें इस प्रकोप में 10 मरीजों की मौत की जानकारी मिली है।
स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप के कारण छह माह के बच्चे समेत 17 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है।
भागीरथपुरा में पिछले दिनों हुई इस जल त्रासदी को लेकर मंगलवार को भी इंदौर में तनावपूर्ण स्थिति देखी गई और इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प भी हुई।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हुजूम जैसे ही भागीरथपुरा पहुंचा, पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। इस दौरान सिंघार और पुलिस अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
बाद में पुलिस की अनुमति के बाद पटवारी और सिंघार समेत कांग्रेस के कुछ नेताओं ने पीड़ित परिवारों के सदस्यों से मुलाकात की और प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की।
पटवारी ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘जिस सरकार के अधिकारी एक कार्यक्रम में 1.50 लाख रुपये के काजू बादाम खा जाते हैं, वही सरकार जहरीला पानी पीने से मरने वाले लोगों के परिजनों को सिर्फ दो लाख रुपये देकर एहसान जताना चाहती है।’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि 17 लोगों की जान चली गई, लेकिन सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष को जनता से मिलने से रोक रही है।
उन्होंने कहा, ‘प्रशासन वास्तविक स्थिति बताने के बजाय केवल प्रतिबंधों का सहारा ले रहा है। यह त्रासदी नगर निगम की घोर लापरवाही का परिणाम है।’
पटवारी ने कहा कि इंदौर की जनता ने वर्षों की मेहनत, अनुशासन और जागरुकता से शहर को स्वच्छता में देश का सिरमौर बनाया लेकिन आज उसी इंदौर को सरकारी लापरवाही के जहरीले पानी ने कलंकित किया है।
उन्होंने कहा, ‘यह कोई हादसा नहीं, बल्कि संगठित सरकारी अपराध है। मां अहिल्या की न्याय नगरी में दूषित पानी से गई हर जान सरकारी हत्या का प्रमाण है।’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस ‘कलंक-कथा’ के प्रमुख चेहरे कैलाश विजयवर्गीय को तुरंत पद से इस्तीफ़ा देना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘प्रभारी मंत्री के नाते मुख्यमंत्री मोहन यादव भी नाक रगड़कर, मेरे इंदौर की जनता से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें!’
सिंघार ने भागीरथपुरा की घटना को भाजपा सरकार की घोर लापरवाही और कुशासन का जीवंत प्रमाण करार देते हुए कहा कि इसका खामियाज़ा आज निर्दोष जनता भुगत रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘मुख्यमंत्री से मेरी स्पष्ट और दृढ़ मांग है कि मृतकों के परिजनों को तत्काल एवं उचित मुआवजा दिया जाए तथा भविष्य में ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।’
इस बीच, कांग्रेस ने एक बयान में प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। पार्टी ने साथ ही इंदौर के महापौर पर प्राथमिकी दर्ज कर आपराधिक मुकदमा चलाने और उन्हें पद से तत्काल बर्खास्त किए जाने की मांग की।
पार्टी ने शिकायतों के बावजूद स्वच्छ पेयजल उपलब्ध न करवाने के दोषियों पर भी कठोर कार्रवाई की मांग की।
देर शाम कांग्रेस नेताओं ने एक बैठक कर 11 जनवरी को इंदौर में प्रस्तावित ‘न्याय यात्रा’ की तैयारियों को अंतिम रूप दिया।
भाषा
ब्रजेन्द्र रवि कांत

Facebook


