मप्र : दुर्लभ बीमारी से लड़ रही बच्ची के इलाज के लिए धन की दरकार, अदालत ने सरकार से जवाब मांगा
मप्र : दुर्लभ बीमारी से लड़ रही बच्ची के इलाज के लिए धन की दरकार, अदालत ने सरकार से जवाब मांगा
इंदौर, 22 जून (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) टाइप-2 से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची की ओर से आर्थिक मदद की गुहार पर सोमवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा और राज्य सरकार से भी यह बताने को कहा कि वह बच्ची की किसी प्रकार सहायता कर सकती है या नहीं।
न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने इंदौर की निवासी तीन वर्षीय अनिका शर्मा की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के अधिवक्ता अनुज भार्गव ने अदालत को बताया कि उन्हें नयी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से कोई निर्देश नहीं मिला है और उन्हें सूचित किया गया है कि वह इस संस्थान की ओर से मामले में पैरवी नहीं कर सकते।
इस पर एकल पीठ ने कहा कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन नयी दिल्ली के एम्स से उचित निर्देश प्राप्त करें और संक्षिप्त जवाब प्रस्तुत करें।
पीठ ने रेखांकित किया कि एसएमए टाइप-2 से पीड़ित तीन वर्षीय बच्ची को तत्काल उपचार की आवश्यकता है।
उच्च न्यायालय ने यह भी दर्ज किया कि बच्ची के माता-पिता उसके उपचार के लिए 7.50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कर चुके हैं जिसमें केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत 50 लाख रुपये की राशि शामिल है, जबकि इलाज का कुल खर्च 9.50 करोड़ रुपये है।
अदालत ने राज्य सरकार की ओर से उपस्थित एक अधिवक्ता से कहा कि वह इस बारे में आवश्यक निर्देश प्राप्त करें कि क्या राज्य सरकार किसी भी प्रकार से याचिकाकर्ता बच्ची की सहायता कर सकती है?
उच्च न्यायालय ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तारीख तय की है।
अनिका के परिवार और स्थानीय लोगों द्वारा बच्ची के उपचार के लिए धन जुटाने का अभियान पिछले सात महीने से जारी है।
बच्ची के पिता प्रवीण शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि अमेरिका से एक इंजेक्शन मंगाकर नयी दिल्ली के एम्स में उनकी बेटी को लगाया जाना है।
उन्होंने कहा,‘‘मेरी बेटी की हालत लगातार बिगड़ रही है। अगर उसे जल्द यह इंजेक्शन नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में उसकी जान को खतरा हो सकता है।’’
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) एक आनुवंशिक तंत्रिका-मांसपेशीय रोग है। इसमें रीढ़ की हड्डी में मौजूद ‘मोटर न्यूरॉन’ धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं जिससे मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और उनका क्षय होने लगता है।
‘मोटर न्यूरॉन’ मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में पाई जाने वाली खास तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं जो दिमाग से शरीर की मांसपेशियों तक अलग-अलग क्रियाओं के वास्ते संदेश पहुंचाती हैं, जिनमें सांस लेना, निगलना और बोलना शामिल हैं।
भाषा हर्ष जोहेब
जोहेब

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