मप्र उच्च न्यायालय ने ‘लव जिहाद के वित्तपोषण’ मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद को जमानत दी

मप्र उच्च न्यायालय ने ‘लव जिहाद के वित्तपोषण’ मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद को जमानत दी

मप्र उच्च न्यायालय ने ‘लव जिहाद के वित्तपोषण’ मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद को जमानत दी
Modified Date: February 4, 2026 / 09:04 pm IST
Published Date: February 4, 2026 9:04 pm IST

इंदौर, चार फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में ‘लव जिहाद’ के वित्तपोषण के आरोप का सामना कर रहे कांग्रेस के एक पूर्व पार्षद को बुधवार को इस शर्त के साथ जमानत दे दी कि वह निचली अदालत में मामले की सुनवाई समाप्त होने तक प्रत्येक रविवार को पुलिस थाने में हाजिरी लगाएगा।

‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी संगठन यह दावा करने के लिए करते हैं कि मुस्लिम पुरुष अन्य धर्मों की महिलाओं को इस्लाम में धर्मांतरित करने के लिए प्रेम जाल में फंसाते हैं।

उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कांग्रेस के पूर्व पार्षद अनवर कादरी को 25,000 रुपये के मुचलके पर रिहा किए जाने का आदेश दिया।

अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोषों पर कोई भी टिप्पणी नहीं कर रही हैं।

एकल पीठ ने कहा,‘‘आवेदक (कादरी) के आपराधिक इतिहास को देखते हुए उसे (निचली अदालत में) मुकदमे की सुनवाई समाप्त होने तक प्रत्येक रविवार को दोपहर 12:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच संबंधित थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया जाता है।’’

कादरी के वकील ने अदालत में कहा कि पीड़ित महिला को इस्लाम में धर्मांतरित करने की साजिश में उनके मुवक्किल के शामिल होने के आरोप को लेकर अभियोजन के पास सह-आरोपी साहिल शेख के कबूलनामे के अलावा कोई भी सबूत नहीं है और इस महिला ने पूर्व पार्षद का नाम तक नहीं लिया है।

बचाव पक्ष के वकील ने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल 29 अगस्त 2025 से जेल में बंद है और निचली अदालत में उसके खिलाफ लम्बित मुकदमे के फैसले में काफी समय लगने की संभावना है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।

उधर, राज्य सरकार के वकील ने बहस के दौरान कादरी की जमानत याचिका पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केस डायरी अदालत में उपलब्ध नहीं है और पूर्व पार्षद के खिलाफ 18 अन्य मामले दर्ज हैं।

उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों, रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और आरोप पत्र के अवलोकन के बाद कादरी की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने रेखांकित किया कि सह-आरोपी साहिल शेख को पहले ही जमानत मिल चुकी है।

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि ‘लव जिहाद’ के कथित वित्तपोषण के मामले में करीब ढाई महीने फरार रहने के बाद कादरी ने 29 अगस्त 2025 को जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।

अधिकारी ने बताया कि शहर के दो युवकों-साहिल शेख और अल्ताफ शाह ने पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर स्वीकार किया था कि युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर धर्मांतरित कराने के लिए उन्हें कादरी ने कुल तीन लाख रुपये दिए थे और यह रकम उन्होंने युवतियों पर खर्च की थी।

अधिकारी के मुताबिक, दोनों युवकों को अलग-अलग मामलों में दो युवतियों से दुष्कर्म और अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

उन्होंने बताया कि दोनों युवकों के बयान के आधार पर कादरी के खिलाफ धन के दम पर धर्मांतरण की साजिश में शामिल होने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था जिसके बाद वह फरार हो गया था।

अधिकारी ने बताया कि कादरी की गिरफ्तारी पर 40 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था और उसपर सख्त प्रावधानों वाला राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) भी लगा दिया गया था।

इंदौर के एक प्रशासनिक अधिकारी की अदालत ने जेल में बंद कादरी की निगम से सदस्यता 10 नवंबर 2025 को समाप्त कर दी थी और उन्हें अगले पांच साल के लिए नगर निगम का चुनाव लड़ने के वास्ते अयोग्य भी घोषित कर दिया था।

भाषा हर्ष नोमान

नोमान


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