मप्र : आपराधिक अवमानना मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक ने मांगी माफी, अदालत ने किया तलब
मप्र : आपराधिक अवमानना मामले में भाजपा विधायक संजय पाठक ने मांगी माफी, अदालत ने किया तलब
जबलपुर (मध्यप्रदेश), छह अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक एवं खनन कारोबारी संजय पाठक ने सोमवार को उच्च न्यायालय से आपराधिक अवमानना मामले में बिना शर्त माफी मांग ली। हालांकि, इसके बावजूद अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा तथा न्यायमूर्ति विनय सराफ की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए।
भाजपा विधायक की तरफ से पैरवी कर रहे पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अपने मुवक्किल की ओर से हलफनामा पेश करते हुए अपनी गलती स्वीकार कर बिना शर्त माफी मांगी।
पीठ ने हलफनामा को रिकॉर्ड में लेते हुए नोटिस जारी कर भाजपा विधायक को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
रोहतगी ने दलील दी कि आपराधिक अवमानना में दंड का प्रावधान है, जब गलती अक्षम्य हो या संबंधित व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार नहीं करे।
उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी के संबंध में हलफनामा पेश किया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने दो अप्रैल को पाठक के खिलाफ कथित अवैध खनन मामले में न्यायाधीश से संपर्क करने के प्रयास को लेकर आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।
कटनी निवासी याचिकाकर्ता अशुतोष दीक्षित के वकील अरविंद श्रीवास्तव ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया था कि पीठ ने स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा से फोन पर संपर्क करने की पाठक की कार्रवाई को अवमाननापूर्ण माना।
उन्होंने बताया था कि पिछले वर्ष सितंबर में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कथित अवैध खनन से जुड़े एक मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। न्यायमूर्ति ने तब कहा था कि पाठक ने ‘‘इस विशेष मामले पर चर्चा’’ के लिए उन्हें फोन करने का प्रयास किया, इसलिए वह इस याचिका की सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं।
दीक्षित ने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि भाजपा विधायक से जुड़ी तीन कंपनियां जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र तथा वन भूमि में ‘‘अवैध और अधिक खनन’’ में संलिप्त हैं।
श्रीवास्तव के अनुसार, उनके मुवक्किल का कहना है कि पूर्व मंत्री पाठक द्वारा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से संपर्क करना न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास है।
उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति मिश्रा ने मामले को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया था।
दीक्षित का आरोप है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायतें की थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने विजय राघवगढ़ (कटनी) से विधायक पाठक के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया।
भाषा सं ब्रजेन्द्र धीरज
धीरज

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