मप्र: मुस्लिम व्यक्ति ने स्कूल के नाम पर बनाई इमारत, प्रशासन ने अवैध बताकर एक हिस्से को तोड़ा
मप्र: मुस्लिम व्यक्ति ने स्कूल के नाम पर बनाई इमारत, प्रशासन ने अवैध बताकर एक हिस्से को तोड़ा
बैतूल, 14 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में अब्दुल नइम नाम के एक व्यक्ति ने कथित तौर पर स्कूल के लिए एक इमारत बनवायी लेकिन प्रशासन ने इस निर्माण को अवैध बताते हुए एक हिस्से को गिरा दिया। एक अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारी के मुताबिक, यह मामला भैंसदेही तहसील के अंतर्गत आने वाले धाबा गांव का है, जहां मंगलवार शाम को प्रशासन ने स्थानीय उप संभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अजीत मारावी के नेतृत्व में इमारत का शेड (लोहे की चादरों से बना एक ढांचा) ढहाने की कार्रवाई की।
इमारत के मालिक नइम और स्थानीय लोगों ने इस कार्रवाई के विरोध में बैतूल के जिलाधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से शिकायत की लेकिन उन्होंने साफ कह दिया कि निर्माण अवैध है और उसे हटाया जाएगा।
सूर्यवंशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘उक्त निर्माण पूरी तरह से अवैध है। ग्राम पंचायत ने पंचायत राज अधिनियम के तहत उस निर्माण को हटाने के लिए पूर्व में तीन नोटिस दिए थे। साथ ही विधिवत आदेश पारित किया। इतना बड़ा ढांचा यदि बनाया जा रहा है तो नियमों का पालन करना जरूरी है।’’
उन्होंने बताया कि यह भवन इसलिए अवैध है क्योंकि निर्माण के लिए पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना होता है जो कि इस मामले में नहीं लिया गया।
इस बीच, ग्रामीणों ने बताया कि तीन दिन पहले एक अफवाह फैल गई कि नइम ने अवैध मदरसा बनवाया है और यहां बच्चों को अनधिकृत रूप से शिक्षा दी जा रही है।
जिलाधिकारी ने इस बारे में पूछे जाने पर बताया कि ना तो इसमें कोई स्कूल चलाया जा रहा है ना ही कोई मदरसा।
उन्होंने बताया कि स्कूल के संचालन के लिए भी कोई प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
धाबा गांव के रहने वाले और जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के कार्यकर्ता रमेश उर्फ सोनू पांसे ने भी कहा कि गांव में मदरसा जैसी कोई गतिविधि नहीं चल रही है क्योंकि गांव की आबादी करीब दो हजार है और यहां सिर्फ चार मुस्लिम परिवार ही रहते हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि निर्माण अवैध था इसलिए ‘अतिक्रमण’ हटाने के लिए प्रशासन से बल मांगा गया था, जिसे उपलब्ध करा दिया गया।
उन्होंने स्पष्ट किया, ‘‘अवैध गतिविधि में किसी को भी सहयोग या संरक्षण प्रदान नहीं किया जाएगा।’’
नइम ने संवाददाताओं को बताया कि बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही शिक्षा मुहैया कराने के मकसद से उन्होंने नर्सरी से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई शुरू करने की योजना बनाई थी और इस उद्देश्य से यह भवन बनवाया।
उन्होंने दावा किया कि 30 दिसंबर को उन्होंने शिक्षा विभाग में स्कूल संचालन की अनुमति के लिए आवेदन जमा किया है।
भवन मालिक ने कहा कि अगर किसी कानून का उल्लंघन हुआ है तो वह जुर्माना भरकर उसकी भरपाई करने को तैयार हैं लेकिन किसी भी सूरत में भवन को ना तोड़ा जाए।
पंचायत से भवन के लिए एनओसी लेने के बारे में पूछे जाने पर नइम ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि पंचायत से भी एनओसी लेनी पड़ती है।
उन्होंने बताया कि 11 जनवरी को पंचायत ने नोटिस जारी कर भवन गिराने का आदेश दिया था लेकिन जब गांव वालों ने स्कूल तोड़े जाने के नोटिस का विरोध किया तो सरपंच ने आनन-फानन में भवन का एनओसी जारी कर दिया।
जिलाधिकारी ने बताया, ‘‘जो एनओसी दिखायी गयी है, वह सरपंच के हाथों से लिखी गई थी। उस पर सचिव के हस्ताक्षर होने चाहिए, क्योंकि वह पंचायत का एग्जीक्यूटिव (कार्यकारी) होता है।’’
हालांकि ग्रामीण चाहते हैं कि भवन को न तोड़ा जाए ताकि बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही अच्छी पढ़ाई मिल सके।
उन्होंने बताया कि गांव वालों की सहमति से ही यह स्कूल बनाया जा रहा है। भाषा सं ब्रजेन्द्र जितेंद्र
जितेंद्र

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