मप्र:विपक्षी दलों के विधायकों ने हरिवंश पर राष्ट्रकुल संसदीय संघ के मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया

मप्र:विपक्षी दलों के विधायकों ने हरिवंश पर राष्ट्रकुल संसदीय संघ के मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया

मप्र:विपक्षी दलों के विधायकों ने हरिवंश पर राष्ट्रकुल संसदीय संघ के मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया
Modified Date: March 31, 2026 / 09:14 pm IST
Published Date: March 31, 2026 9:14 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

भोपाल, 31 मार्च (भाषा) राष्ट्रकुल संसदीय संघ (भारत क्षेत्र 6) के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन मंगलवार को उस समय विवादों में घिर गया, जब इसमें शामिल विरोधी दलों के युवा विधायकों ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के संबोधन की आलोचना करते हुए उन पर इस मंच के दुरुपयोग का आरोप लगाया।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोमवार को इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया था जबकि इसके समापन समारोह में हरिवंश मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

हरिवंश ने अपने संबोधन के दौरान 2014 के बाद भारत हुए परिवर्तन का विस्तार से उल्लेख किया और कहा कि विकसित भारत का सपना देखने में देश को इतना लंबा समय लग गया।

उन्होंने मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि कई देशों में आज ‘लॉकडाउन’ जैसे हालात हैं लेकिन भारत में स्थिति नियंत्रण में हैं क्योंकि देश का मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व मजबूत है और वह भविष्योन्मुखी नीतियों पर अमल करता है।

हरिवंश ने इसके अलावा साल 2014 से पहले भारत की अर्थव्यवस्था का भी उल्लेख किया और कहा कि एक समय था जब दुनिया के अर्थशास्त्री यह कहते थे कि भारत दो से तीन प्रतिशत से अधिक विकास नहीं कर सकता और वे इसे ‘हिंदू ग्रोथ रेट’ का नमा देते थे।

उन्होंने कहा कि लेकिन आज भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर यह साबित कर दिया है कि सही नीतियों और संकल्प के साथ देश तेजी से तरक्की कर सकता है।

सम्मेलन के समापन के बाद इसमें शामिल विपक्षी दलों के नेताओं ने हरिवंश के संबोधन की आलोचना करते हुए उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया।

मध्यप्रदेश के उज्जैन जिले की तराना विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि उपसभापति ने इस मंच का उपयोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘गुणगान’ के लिए उपयोग किया, जिसकी निंदा की जानी चाहिए।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘उपसभापति का भाषण सुनकर ऐसा लगा मानो उनका जन्म 2014 के बाद हुआ है और उससे पहले देश में कुछ हुआ ही नहीं।’’

परमार ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह तक विभिन्न प्रधानमंत्रियों ने देश को बनाने में योगदान दिया लेकिन उन्होंने इनका कोई उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें (हरिवंश) सोच-समझकर बोलना चाहिए। मैं इसकी निंदा करता हूं। उपसभापति (राज्यसभा) के पद पर बैठे व्यक्ति को यह शोभा नहीं देता है।’’

परमार ने कहा कि इस प्रकार के आयोजनों जैसे मंच का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के धरियावद से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक थावरचंद डामोर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यह युवा सम्मेलन था और उसका मुख्य विषय ‘लोकतंत्र में युवा भागीदारी’ और विकसित भारत में युवाओं का योगदान था लेकिन उपसभापति ने इसे मोदी के ‘गुणगान’ का मंच बना दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘यही करना था तो इसके लिए जनसभा का आयोजन किया जा सकता था। जनसभा में जितना बोलना हो, बोलिए। लेकिन आज का मंच उसके लिए नहीं था। सम्मेलन में तीन राज्यों के अलग-अलग विचारधाराओं के युवा विधायक आए थे। सब मिलकर राष्ट्र को कैसे आगे ले जा सकते हैं, यह संदेश होना चाहिए था लेकिन यह नहीं हुआ।’’

डामोर ने कहा, ‘‘उनका पूरा भाषण लिखित था और सुनियोजित तरीके से पेश किया गया था।’’

राजस्थान के जयपुर जिले की चोमूं विधानसभा से कांग्रेस विधायक डॉ. शिखा मील बराला ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें इतने शिक्षित व्यक्ति हरिवंश से ‘बहुत कुछ’ सीखने को मिलेगा लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ऐसा महसूस हुआ जैसे कोई यह किसी राज्यपाल का अभिभाषण हो और वह सरकार की तारीफों के पुल बांध रहे हों।’’

उन्होंने कहा कि उपसभापति ने बताया कि 2014 के पहले कितने एम्स थे, कितने मेडिकल कॉलेज थे और कितने हवाई अड्डे थे जबकि सम्मेलन के मुख्य विषय से वह दूर रहे।

बराला ने कहा, ‘‘मुझे तो उनका संबोधन भाजपा का ‘मार्केटिंग एजेंडा’ लगा। बहुत ही निराशाजनक था।’’

उन्होंने कहा कि बतौर विधायक सभी युवा विधायकों को यह उम्मीद थी कि वह उन्हें कुछ ‘अच्छी सीख’ देंगे लेकिन यह इसके विपरीत निकला।

भाषा ब्रजेन्द्र

राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में