पश्चिम एशिया संघर्ष : इंदौरी नमकीन पर महंगाई की आंच, उत्पादन पर भी असर
पश्चिम एशिया संघर्ष : इंदौरी नमकीन पर महंगाई की आंच, उत्पादन पर भी असर
इंदौर (मध्यप्रदेश), तीन अप्रैल (भाषा) लौंग की तीखी सेंव और चटपटा ‘मिश्रण’ हो या बिना मिर्च वाले मुलायम ‘गाठिये’, अपने खास जायके के लिए देश-दुनिया में मशहूर इंदौर के नमकीन आम ग्राहकों के लिए 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम महंगे हो गए हैं।
नमकीन निर्माताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वाणिज्यिक रसोई गैस और प्लास्टिक की पैकिंग सामग्री की कीमतों में इजाफे का हवाला देते हुए दाम बढ़ाए हैं।
शहर के नमकीन-मिष्ठान्न क्रेता एवं विक्रेता कल्याण संघ के सचिव अनुराग बोथरा ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘पश्चिम एशिया के संघर्ष से वाणिज्यिक रसोई गैस और प्लास्टिक की पैकिंग सामग्री महंगी हो गई है।’
उन्होंने बताया कि नमकीन की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की थैली जो पहले 190 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव में मिलती थी, उसकी कीमत बढ़कर 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
बोथरा के मुताबिक फिर से इस्तेमाल किए जा सकने जाने वाले प्लास्टिक से बने उन डिब्बों के दाम दोगुने हो गए हैं जिनमें नमकीन पैक किया जाता है।
उन्होंने बताया,’नमकीन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल के दाम में भी इजाफा हुआ है। नतीजतन खुदरा बाजार में नमकीन की कीमतें 10 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ गई हैं।’’
बोथरा ने कहा कि ईंधन की परेशानियों से उन नमकीन इकाइयों में उत्पादन पर ज्यादा असर पड़ा है जो पूरी तरह वाणिज्यिक रसोई गैस पर निर्भर हैं।
नमकीन उत्पादन के मामले में इंदौर, देश का अग्रणी केंद्र है। शहर की करीब 1,500 छोटी-बड़ी नमकीन इकाइयों से हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का घरेलू कारोबार और निर्यात होता है।
उद्योग के जानकारों का मानना है कि अगर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में जल्द राहत नहीं मिली, तो आने वाले महीनों में नमकीन और महंगा हो सकता है। भाषा हर्ष संतोष
संतोष

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