दो साल बाद मध्यप्रदेश की सड़कों पर एक भी निराश्रित गौवंश नहीं दिखेगा:राज्य सरकार

दो साल बाद मध्यप्रदेश की सड़कों पर एक भी निराश्रित गौवंश नहीं दिखेगा:राज्य सरकार

दो साल बाद मध्यप्रदेश की सड़कों पर एक भी निराश्रित गौवंश नहीं दिखेगा:राज्य सरकार
Modified Date: February 25, 2026 / 07:11 pm IST
Published Date: February 25, 2026 7:11 pm IST

भोपाल, 25 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा में बुधवार को सदस्यों ने निराश्रित गौवंश मवेशियों के सड़कों पर घूमने और उनकी वजह से होने वाले सड़क हादसों पर चिंता जताई, जिसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया कि अगले दो सालों के बाद राज्य की सड़कों पर ऐसा एक भी पशु नहीं दिखेगा।

कांग्रेस के अजय सिंह ऊर्फ राहुल भैया और कैलाश कुशवाहा ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में निराश्रित पशुओं की समस्या विकराल रूप ले चुकी है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पशुपालन एवं डेयरी विभाग पर करोड़ों रुपये व्यय किए जाने के बावजूद मध्यप्रदेश में करीब 10 लाख निराश्रित पशु सड़कों पर विचरण कर रहे हैं, जिससे किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अन्य सड़कों पर यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं की घटनाएं बढ़ रही हैं।

अजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार की उदासीनता के कारण समस्या का प्रभावी समाधान नहीं हो पा रहा है तथा किसान एवं आमलोग भारी परेशानी झेल रहे हैं।

राज्य के पशुपालन और डेयरी मंत्री लखन पटेल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि निराश्रित गौवंश मवेशियों का व्यवस्थापन ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा नगरीय क्षेत्रों में नगरीय एवं आवास विकास विभाग के जिम्मे है और संबंधित विभागों द्वारा सतत कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने बताया कि 2025 में नगरीय निकायों द्वारा सड़कों पर विचरण करने वाले लगभग 78,153 आवारा मवेशियों को पकड़ा गया तथा सड़कों पर घूम रहे पालतू पशुओं के मालिकों पर कुल 25 लाख 58 हजार 753 रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

पटेल ने बताया कि मध्यप्रदेश में कुल 3,040 गौशालाएं चल रही हैं, जिनमें मुख्यमंत्री गौसेवा योजना के अंतर्गत 2,325 गौशालाएं, अशासकीय स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा 703 तथा नगरीय निकायों द्वारा 12 गौशालाएं संचालित हैं।

उन्होंने कहा कि इन गौशालाओं में लगभग 4.80 लाख अवारा पशुओं को आश्रय उपलब्ध कराया गया है और यह व्यवस्थापन एक सतत प्रक्रिया है।

मंत्री ने बताया कि निराश्रित गौवंश मवेशियों के बेहतर व्यवस्थापन के साथ गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा ‘मध्यप्रदेश राज्य में स्वावलंबी गौशालाओं की स्थापना नीति-2025’ को स्वीकृति प्रदान की गई है।

उन्होंने बताया कि इसके तहत न्यूनतम 5,000 गौवंश मवेशी क्षमता वाली स्वावलंबी गौशाला (कामधेनु निवास) के लिए न्यूनतम 130 एकड़ राजस्व भूमि का प्रावधान किया गया है, जिसमें से पांच एकड़ भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा सकेंगी।

उन्होंने कहा कि गौशालाओं में उपलब्ध गौवंश मवेशियों के भरण-पोषण के लिए अनुदान राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौवंश प्रतिदिन कर दी गई है।

मंत्री ने सदन को आश्वस्त करते हुए कहा, ‘‘अगले दो वर्षों में नई गौशालाओं के निर्माण और व्यवस्थाओं के पूर्ण होने के बाद सड़कों पर निराश्रित गौवंश दिखाई नहीं देगा। मुझपर विश्वास रखिए। दो साल बाद एक भी गौवंश सड़कों पर नहीं दिखेगा।’’

भाषा दिमो ब्रजेन्द्र राजकुमार

राजकुमार


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