पंचायत चुनाव, अस्त-व्यस्त…निरस्त! किसकी गलती.. आखिर आरक्षण को लेकर कहां फंसा पेंच?

Panchayat elections, chaotic...cancelled! Whose fault

: , December 30, 2021 / 11:34 AM IST

भोपालः आज बात होगी पंचायत चुनाव के निरस्त होने पर की आखिर इसके निरस्त होने की नौबत क्यों आई। आखिर आरक्षण को लेकर पेंच कहां फंसा। क्या कोई कानूनी कमी या खामी रह गई या फिर जो आरोप कांग्रेस लगा रही है कि सरकार की मंशा ही नहीं थी आरक्षण देने और चुनाव कराने की। जो भी हो लेकिन अब चुनाव में जाने वाले प्रत्याशियों को इंतजार है सुप्रीम फैसले का।

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मध्यप्रदेश में पंचायत चुनाव निरस्त करने का फैसला राज्य निर्वाचन आयोग ने भले अब जाकर लिया हो पर ओबीसी आरक्षण के बिना पंचायत चुनाव निरस्त होने की पटकथा विधानसभा में उसी दिन लिख दी गई थी। जब सीएम सहित पूरी विधानसभा ने तय कर लिया था कि मध्य प्रदेश में बिना ओबीसी आरक्षण के पंचायत चुनाव नहीं कराये जायंगे..फिर कैबिनेट के प्रस्ताव और उस पर राज्यपाल की मंजूरी के साथ ही तय हो गया था कि एमपी में पंचायत चुनाव निरस्त होंगे। जिसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 4 दिसंबर को जारी अधिसूचना को निरस्त कर दिया। आयोग ने ये फैसला विधि विशेषज्ञों के साथ हुई बैठक के बाद किया। चुनाव निरस्त होने के बाद आयोग उम्मीदवारों को जमानत राशि वापस करेगी।

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इससे पहले 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने OBC के लिए आरक्षित पदों पर निर्वाचन प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। जिसे राज्य और केंद्र सरकार ने चुनौती दी है। इन याचिकाओं पर 3 जनवरी को सुनवाई होगी। इसके बाद ही तय होगा कि मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव किन परिस्थितियों में और किस व्यवस्था के तहत होते हैं। अध्यादेश निरस्त होने के बाद कमलनाथ सरकार के समय 2019 में लागू की गई परिसीमन व्यवस्था लागू हो गई है। अगर मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव कराने हैं तो राज्य निर्वाचन आयोग को कमलनाथ सरकार के समय बने कानून के तहत वैसा करना होगा पर सरकार चाहती है की ओबीसी आरक्षण के साथ ही चुनाव हो!

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सियासी आरोप प्रत्यारोप से इतर सवाल उठ रहा है कि एमपी में पंचायत चुनाव निरस्त होने की नौबत क्यों आई। सबसे बड़ा सवाल अब पंचायत चुनाव कब होगा? इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट में 3 जनवरी सुनवाई के बाद होगा। दरअसल राज्य सरकार विधानसभा में पहले ही संकल्प पारित कर चुकी है कि पंचायत चुनाव होंगे तो OBC आरक्षण के साथ ऐसी परिस्थिति में राज्य और केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में साबित करना होगा कि राज्य में OBC को 27% आरक्षण पंचायत चुनावों में देना आवश्यक है। वहीं सरकार ने सभी कलेक्टरों को OBC वोटरों की गिनती के आदेश दिए हैं..ये सर्वे 7 जनवरी तक पूरी करनी है। राज्य सरकार इसे सुप्रीम कोर्ट में OBC वर्ग को रिजर्वेशन देने का आधार बना सकती है। फिलहाल जब तक आंकड़े नहीं आते, तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। बहरहाल 3 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ही मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव की नई तारीखों का रास्ता साफ़ हो सकेगा।

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