महाराष्ट्र विधानसभा में महिला आयोग के बजट को लेकर भाजपा और विपक्षी विधायकों ने सवाल उठाए

महाराष्ट्र विधानसभा में महिला आयोग के बजट को लेकर भाजपा और विपक्षी विधायकों ने सवाल उठाए

महाराष्ट्र विधानसभा में महिला आयोग के बजट को लेकर भाजपा और विपक्षी विधायकों ने सवाल उठाए
Modified Date: March 9, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: March 9, 2026 4:13 pm IST

मुंबई, नौ मार्च (भाषा) महाराष्ट्र विधानसभा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य सुधीर मुनगंटीवार और विपक्षी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) विधायक जयंत पाटिल ने राज्य महिला आयोग के स्वीकृत बजट और वास्तविक व्यय के बीच कथित विसंगतियों को लेकर सोमवार को मंत्री मेघना बोर्डिकर से जवाब मांगा।

पूर्व मंत्री मुनगंटीवार ने प्रश्नकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग को आवंटित बजट का विवरण मांगा और सवाल किया कि आयोग के व्यय संबंधी प्रस्तावों की फाइल अनुमोदन के लिए मंत्रालय (सचिवालय) क्यों भेजी जा रही हैं।

मुनगंटीवार ने कहा, ‘‘यह एक स्वतंत्र आयोग है और इसे अपना स्वायत्त दर्जा बनाए रखते हुए अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च करने की अनुमति दी जानी चाहिए। राज्य के अधिकारी हर व्यय फाइल को मंजूरी के लिए मंत्रालय भेजने की मांग क्यों करते हैं? यह अनुचित है। मैं खर्च का पूरा ब्योरा चाहता हूं।’’

मुनगंटीवार को नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया था।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री बोर्डिकर ने प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि सरकार ने आयोग के लिए कभी धन नहीं रोका और उसकी आवश्यकताओं के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की है।

मुनगंटीवार के सवालों के जवाब में मंत्री ने कहा कि आयोग ने 2023-24 में 24 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसे जारी कर दिया गया और वर्ष 2026-27 के लिए उसकी मांग के अनुसार ही 18.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

हालांकि विपक्षी राकांपा (शप) विधायक जयंत पाटिल ने मंत्री के बयान का खंडन करते हुए कहा कि सदन में प्रस्तुत आंकड़े वास्तविक रूप से जारी की गई राशि को नहीं दर्शाते।

पाटिल ने कहा, ‘‘मंत्री ने सदन को गलत जानकारी दी है। वर्ष 2023-24 में 15.08 करोड़ रुपये का बजट था, लेकिन वास्तव में केवल 4.63 करोड़ रुपये जारी किए गए। वर्ष 2024-25 में 15.28 करोड़ रुपये का प्रावधान था, मगर 5.83 करोड़ रुपये ही दिए गए। अगले वर्ष 18.09 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन केवल 6.71 करोड़ रुपये जारी किए गए। असली तथ्य ये हैं।”

मुनगंटीवार ने कहा कि पर्याप्त धनराशि जारी न होने से आयोग के कामकाज, खासकर जागरूकता अभियान और अनुसंधान गतिविधियों पर असर पड़ रहा है।

हालांकि मंत्री बोर्डिकर ने दोहराया कि धनराशि आवश्यकता के आधार पर जारी की जाती है और मंत्रालय के समक्ष आयोग की ओर से कोई लंबित मांग नहीं है।

भाषा खारी सुरेश

सुरेश


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