अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति को बरी किया

अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति को बरी किया

अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति को बरी किया
Modified Date: April 30, 2026 / 05:08 pm IST
Published Date: April 30, 2026 5:08 pm IST

ठाणे, 30 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने नाबालिग चचेरी बहन का यौन उत्पीड़न करने और उसे धमकी देने के आरोपी 23 वर्षीय युवक को सभी आरोपों से बरी कर दिया है, क्योंकि पीड़िता और अभियोजन पक्ष की प्रमुख गवाह ने पुलिस की ओर से दर्ज मामले का समर्थन नहीं किया।

यह आदेश 27 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश प्रेमल एस विठलानी ने दिया, जो यौन अपराध से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई कर रहे हैं। यह आदेश बृहस्पतिवार को उपलब्ध कराया गया।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि 18 नवंबर, 2018 को, आरोपी अपनी चचेरी बहन (14) को एक ऑटो-रिक्शा में ले गया, उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया और धमकी दी कि यदि उसने उससे शादी करने से इनकार किया तो वह उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित कर देगा।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसके परिवार के सदस्य अपने बयान से मुकर गये।

अदालत ने कहा कि हालांकि अभियोजन पक्ष ने स्कूल रिकॉर्ड और जन्म प्रमाण पत्रों के माध्यम से यह सफलतापूर्वक साबित कर दिया कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी, लेकिन वह कथित अपराध के ‘बुनियादी तथ्यों’ को साबित करने में विफल रहा।

फैसले में अदालत ने कहा, ‘‘मुख्य गवाह अर्थात् पीड़िता, उसके चचेरे भाई और उसकी दादी ने घटना के बारे में कुछ भी नहीं कहा है। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि अभियोजन पक्ष अपना मामला साबित करने में सफल रहा है।’’

पीड़िता के बयान का हवाला देते हुए अदालत ने कहा, ‘‘पीड़िता ने भी अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया है। उसने घटना से साफ इनकार किया है। उसने इस बात से इनकार किया है कि घटना वाले दिन आरोपी उसे ऑटो-रिक्शा में ले गया, उसके छाती पर हाथ फेरा, उसे गालियां दीं और धमकी दी।’’

अदालत ने कहा कि पीड़िता की दादी ने ही घटना की सूचना दी थी लेकिन जिरह के दौरान उन्होंने माना कि वह अनपढ़ हैं और उन्होंने सुनी-सुनाई बातों के आधार पर शिकायत दर्ज कराई थी।

अदालत ने कहा कि बाद में पीड़िता की दादी ने यहां तक कहा कि आरोपी घटना वाले दिन उनके घर आया ही नहीं था।

आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 354-ए (1) (आई) (यौन उत्पीड़न), 504 (जानबूझकर अपमान करना) और 506-दो (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।

न्यायाधीश ने फैसला सुनाया, ‘‘उपरोक्त बातों के मद्देनजर, आरोपी को बरी किया जाना आवश्यक है।’’

भाषा राजकुमार संतोष

संतोष


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