घटनास्थल पर बालों के गुच्छे मिलने से जाह्नवी कुकरेजा पर क्रूर हमले के संकेत मिलते हैं: अदालत

घटनास्थल पर बालों के गुच्छे मिलने से जाह्नवी कुकरेजा पर क्रूर हमले के संकेत मिलते हैं: अदालत

घटनास्थल पर बालों के गुच्छे मिलने से जाह्नवी कुकरेजा पर क्रूर हमले के संकेत मिलते हैं: अदालत
Modified Date: February 4, 2026 / 01:43 pm IST
Published Date: February 4, 2026 1:43 pm IST

मुंबई, चार फरवरी (भाषा) मुंबई की एक अदालत ने वर्ष 2011 के जाह्नवी कुकरेजा हत्या मामले में सुनवाई के दौरान कहा कि अपराध स्थल पर बिखरे हुए बालों के गुच्छे इस बात के ‘‘पुख्ता सबूत’’ हैं कि मुंबई की युवती जाह्नवी कुकरेजा की 2021 में हत्या से पहले उसे बेरहमी से मारा पीटा गया था।

अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए कुकरेजा के दोस्त श्री जोगधनकर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने हालांकि पीड़िता की अन्य दोस्त और इस मामले में सह-आरोपी दीया पदालकर को यह कहते हुए बरी कर दिया कि ‘‘अपराध में उसकी संलिप्तता’’ को लेकर संदेह है।

अदालत ने फैसला शनिवार को सुनाया और मंगलवार को विस्तृत आदेश उपलब्ध कराया गया।

मुंबई के पश्चिमी हिस्से स्थित खार की एक इमारत में नव वर्ष की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पार्टी में शामिल होने गई कुकरेजा (19) की एक जनवरी, 2021 को हत्या कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, पार्टी इमारत की छत पर आयोजित हुई थी जिसमें शामिल होने के बाद सीढ़ियों पर कुकरेजा के साथ मारपीट की गई और उसकी हत्या कर दी गई।

पुलिस ने आरोप लगाया है कि जोगधनकर और पदालकर के बीच नजदीकी संबंधों को लेकर तीन दोस्तों के बीच झगड़ा हुआ था और 19 वर्षीय कुकरेजा को पांचवीं मंजिल से सीढ़ियों से नीचे घसीटा गया था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण नवंदर ने शनिवार को जोगधनकर को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत हत्या का दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

न्यायाधीश ने ‘‘घटना की कड़ियों’’ पर गौर किया और बचाव पक्ष के दुर्घटनावश गिरने से मौत अथवा आत्महत्या की दलीलों को खारिज कर दिया और कहा कि जोगधनकर का शोर नहीं मचाना या पीड़ित की मदद नहीं करना ही गंभीर अपराध साबित करता है।

अदालत ने कहा, ‘‘इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। युवती की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह आत्महत्या कर ले।’’

न्यायाधीश ने कहा कि ‘‘पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पीड़ित को कई चोट लगने का जिक्र है और अगर यह दुर्घटनावश गिरने या आत्महत्या का मामला होता तो पीड़ित को ये चोटें नहीं लगतीं’’।

अदालत ने कहा कि इसके अलावा घटनास्थल से बड़ी मात्रा में उसके बालों के गुच्छे बरामद होने का भी कोई कारण नहीं था।

अदालत ने कहा कि घटनास्थल पर और दूसरी और पहली मंजिल की सीढ़ियों पर मिले बालों के गुच्छे आरोपी द्वारा किए गए हमले की ओर इशारा करते हैं।

सह-आरोपी पदालकर की भूमिका के बारे में न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने अपराध स्थल पर उसकी उपस्थिति साबित की है लेकिन ‘‘अपराध में उसकी संलिप्तता’’ संदेहास्पद है, इसलिए उसे संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए।

भाषा सुरभि अमित

अमित


लेखक के बारे में