इसरो दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान की तकनीक पर काम कर रहा : नारायणन

इसरो दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान की तकनीक पर काम कर रहा : नारायणन

इसरो दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान की तकनीक पर काम कर रहा : नारायणन
Modified Date: February 5, 2026 / 10:30 pm IST
Published Date: February 5, 2026 10:30 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

पुणे, पांच फरवरी (भाषा) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी वर्तमान में दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान (आरएलवी) की प्रौद्योगिकी के विकास पर कार्य कर रही है।

उन्होंने रेखांकित किया कि इसका उद्देश्य भारत की सीमित लागत के साथ अंतरिक्ष गतिविधियों को अंजाम देना है।

नारायणन ने पिंपरी चिंचवड स्थित डी वाई पाटिल इंटरनेशनल विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह के दौरान संवाददाताओं से कहा कि यह कार्य प्रायोगिक चरण में है।

इसरो प्रमुख ने ‘स्पेसएक्स’ जैसी निजी कंपनियों से मिल रही प्रतिस्पर्धा के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान अंतरिक्ष कार्यक्रम को अधिक लागत प्रभावी बनाते हैं। हम वर्तमान में दोबारा इस्तेमाल किये जाने वाले प्रक्षेपण यान (आरएलवी) प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम इसे किसी के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं मानते। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम भारत के लिए है। ताकत ही ताकत का सम्मान करती है, और एक जीवंत अंतरिक्ष कार्यक्रम के बिना कोई भी हमारा समर्थन नहीं करेगा।’’

इसरो प्रमुख ने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के बारे में कहा कि इसे 2027 तक अमली जामा पहनाने का लक्ष्य है, इसके तहत मानवयुक्त उड़ान से पहले तीन मानवरहित मिशन को अंजाम देने की योजना बनाई गई है।

नारायणन ने कहा हालांकि पहले मानवरहित मिशन की तारीखें अभी तक तय नहीं की गई हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा और अगले दोनों वर्षों को ‘गगनयान वर्ष’ घोषित किया गया है, और काम योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।

इसरो प्रमुख ने भविष्य के ग्रहीय मिशन के बारे में कहा कि चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 स्वीकृत कार्यक्रम हैं और इन्हें 2028 के आसपास क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि शुक्रयान मिशन से संबंधित गतिविधियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही हैं।

नारायणन ने पीएसएलवी मिशन से संबंधित हालिया घटनाओं को लेकर पूछे सवाल पर कहा कि संगठन इन्हें असफलता के रूप में नहीं देखता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हर चीज एक सीखने की प्रक्रिया है। समितियां आंकड़ों का विश्लेषण कर रही हैं और प्रणालियों को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में काम कर रही हैं।’’

इसरो प्रमुख ने कहा कि विश्लेषण पूरा होने के बाद विस्तृत निष्कर्ष साझा किए जाएंगे।

नारायणन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इसरो राष्ट्रीय जरूरतों और आम नागरिक की सेवा पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को वर्तमान दो प्रतिशत से बढ़ाकर आठ प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।

भाषा धीरज शफीक

शफीक


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