नागपुर की टीम ने सिलक्यारा सुरंग में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बनाए रखने में मदद की |

नागपुर की टीम ने सिलक्यारा सुरंग में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बनाए रखने में मदद की

नागपुर की टीम ने सिलक्यारा सुरंग में कार्बन डाईऑक्साइड का स्तर बनाए रखने में मदद की

:   November 29, 2023 / 08:51 PM IST

(फोटो के साथ)

नागपुर, 29 नवंबर (भाषा) उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सिलक्यारा सुरंग से 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चलाए गए विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के दौरान नागपुर स्थित वेस्टर्न कोल फील्ड्स की एक टीम ने यह सुनिश्चित करने के लिए वहां कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर की निगरानी की ताकि श्रमिकों को सांस लेने में परेशानी न हो।

सिलक्यारा सुरंग में करीब 17 दिन तक फंसे रहे सभी 41 श्रमिकों को विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त बचाव अभियान के तहत मंगलवार शाम को सकुशल बाहर निकाल लिया गया।

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सहायक कंपनी वेस्टर्न कोल फील्ड्स (डब्ल्यूसीएल) के तीन विशेषज्ञों ने 20 नवंबर से ही सिलक्यारा सुरंग स्थल पर डेरा डाला हुआ था। टीम के सदस्य महाप्रबंधक (बचाव सेवाएं) दिनेश बिसेन ने कहा कि वे इस अभियान से जुड़े प्रमुख निर्णयों में शामिल कोर कमेटी का हिस्सा थे।

उन्होंने कहा कि उप प्रबंधक (बचाव सेवाएं) एम विष्णु और केन्द्रीय खान योजना एवं डिजाइन संस्थान (सीएमपीडीआई) के निदेशक ए के राणा भी टीम का हिस्सा थे।

चारधाम यात्रा मार्ग पर निर्माणाधीन साढ़े चार किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग का एक हिस्सा 12 नवंबर को ढह गया था, जिसके कारण 41 श्रमिक सुरंग में फंस गए थे।

दिनेश बिसेन ने पीटीआई-भाषा को बताया कि सुरंग के अंदर अमेरिका निर्मित ऑगर बोरिंग मशीन, क्रेन और लिफ्ट जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया गया जिससे कार्बन डाइऑक्साइड उत्पन्न हुई थी।

उन्होंने कहा कि उनकी टीम की भूमिका कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना था कि यह सुरंग के अंदर न बढ़े और श्रमिकों को सांस लेने में कोई कठिनाई न हो। जब भी कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ता था, मशीनें बंद कर दी जाती थीं और सुरंग के अंदर हवा के प्रवाह में सुधार के प्रयास शुरू किए जाते थे।

भाषा रवि कांत अविनाश

अविनाश

 

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