उद्धव गुट के छह सांसदों के शिवसेना में शामिल होने पर शिंदे ने कहा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ पूरा हुआ

उद्धव गुट के छह सांसदों के शिवसेना में शामिल होने पर शिंदे ने कहा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ पूरा हुआ

उद्धव गुट के छह सांसदों के शिवसेना में शामिल होने पर शिंदे ने कहा, ‘ऑपरेशन टाइगर’ पूरा हुआ
Modified Date: June 22, 2026 / 08:48 pm IST
Published Date: June 22, 2026 8:48 pm IST

मुंबई, 22 जून (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को घोषणा की कि शिवसेना (उबाठा) के सभी छह बागी लोकसभा सदस्यों के आधिकारिक तौर पर सत्ताधारी शिवसेना में शामिल होने के साथ ही ‘‘ऑपरेशन टाइगर’’ अब पूरा हो गया है। इससे उद्धव ठाकरे के गुट में एक और विभाजन की प्रक्रिया पूरी हो गई।

नयी दिल्ली में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की संसदीय दल की एक अहम बैठक में शामिल न होने के पांच दिन बाद, शिंदे और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में बागी सांसद शिवसेना में शामिल हुए। शिवसेना (उबाठा) संसदीय दल की बैठक में केवल तीन लोकसभा सदस्य शामिल हुए थे।

पाला बदलने वाले शिवसेना (उबाठा) के लोकसभा सदस्य हैं: संजय देशमुख (यवतमाल), संजय जाधव (परभणी), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व), नागेश पाटिल-आष्टीकर (हिंगोली), ओमप्रकाश राजे निंबालकर (धाराशिव) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी)।

शिंदे ने पाला बदलने वाले छह सांसदों को जमीन से जुड़े ‘धुरंधर’ बताते हुए कहा, ‘‘मेरा अभियान एकदम पुख्ता होता है।’’

उपमुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ‘‘ऑपरेशन टाइगर” अब पूरा और सफल हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों की संख्या के हिसाब से शिवसेना अब महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।

ठाकरे खेमे में दल-बदल कराने और सांसदों को अपनी तरफ लाने के लिए शिवसेना के कदम को ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया गया था।

इन बागी नेताओं ने 2024 के आम चुनावों में भाजपा और शिवसेना के उम्मीदवारों को हराया था। शिवसेना (उबाठा) ने 2024 के आम चुनाव में महाराष्ट्र में नौ लोकसभा सीट जीती थीं। शिवसेना में बागी सांसदों के शामिल होने से सत्ताधारी गठबंधन ‘महायुति’ में शिंदे की मोल-भाव करने की ताकत बढ़ने की उम्मीद है; इस गठबंधन में भाजपा और राकांपा भी शामिल हैं।

पत्रकारों से बातचीत में शिंदे ने कहा, ‘‘ये लोकसभा सदस्य अब उस असली शिवसेना में शामिल हो गए हैं, जो दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की सीख का पालन करती है। चार साल पहले मैंने एक कड़ा कदम उठाया था और अब मैंने छक्का मारा है (यह उन सांसदों की संख्या की ओर इशारा है, जिन्होंने पाला बदला है)।”

उन्होंने जून 2022 में अविभाजित शिवसेना में की गई अपनी बगावत का भी जिक्र किया, जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार गिर गई थी और वह मुख्यमंत्री बन गए थे।

शिंदे ने कहा, ‘‘मैंने पहले (जून 2022 में शिवसेना में विभाजन) दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों और शिवसेना को बचाने के लिए ऐसा किया था। अब, यह कदम (शिवसेना उबाठा के लोकसभा सदस्यों में बगावत) शिवसेना के विस्तार का दूसरा चरण है।”

एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे सभी 2029 के लोकसभा चुनाव में अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से शिवसेना के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे और निश्चित रूप से चुने जाएंगे।

उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘महाराष्ट्र एक प्रगतिशील राज्य है। नए लोग हमारी पार्टी से जुड़ रहे हैं, क्योंकि हमारा एजेंडा विकास और प्रगति का है। आप जानते हैं कि मैं अपनी बात का पक्का हूं। लोग मुझ पर और शिवसेना पर भरोसा कर रहे हैं, जो कार्यकर्ताओं और आम लोगों की पार्टी है।’’

शिवसेना (उबाठा) नेताओं का नाम लिये बिना, शिंदे ने उन्हें अपशब्द कहने के बजाय आत्म-मंथन करने की सलाह दी। यह इशारा ठाकरे के करीबी और राज्यसभा सांसद संजय राउत की ओर था, जिन्होंने पिछले हफ्ते बागी नेताओं के खिलाफ अपशब्दों से भरी तीखी टिप्पणी की थी।

शिंदे ने कहा, “यह उन लोगों के लिए आत्ममंथन का समय है, जिनकी पार्टी को इन सांसदों ने छोड़ा है। वे सुबह तो गाली-गलौज करते हैं, लेकिन शाम को अपना सुर बदलकर उन्हें मनाने की कोशिश करते हैं। लगता है कि उनमें ही कोई समस्या है।”

शिंदे ने कहा, “इन सभी सांसदों ने अपने समर्थकों से बात करने के बाद ही शिवसेना में शामिल होने का फ़ैसला किया है। मैं आपकी निजी समस्याओं को भी हल करने के लिए मौजूद हूं।”

शिवसेना (उबाठा) में अपने विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जो लोग 2022 से हमें बुरा-भला कह रहे हैं, उन्हें अपना काम करने दें। इससे उनकी मुश्किलें ही बढ़ेंगी।”

शिंदे ने भरोसा दिलाया कि बागी सांसदों के प्रतिनिधित्व वाले लोकसभा क्षेत्रों के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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