देश में पारसी समुदाय का योगदान अमूल्य, सरकार उनकी घटती आबादी रोकने को प्रतिबद्ध: रीजीजू

देश में पारसी समुदाय का योगदान अमूल्य, सरकार उनकी घटती आबादी रोकने को प्रतिबद्ध: रीजीजू

देश में पारसी समुदाय का योगदान अमूल्य, सरकार उनकी घटती आबादी रोकने को प्रतिबद्ध: रीजीजू
Modified Date: May 10, 2026 / 10:00 am IST
Published Date: May 10, 2026 10:00 am IST

मुंबई, 10 मई (भाषा) केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने देश के विकास में पारसी समुदाय के अटूट योगदान की सराहना करते हुए कहा कि सरकार इस समुदाय की रक्षा करने और उनकी घटती आबादी को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुंबई के ‘यशवंतराव चव्हाण सेंटर’ में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित ‘‘आधुनिक भारत में पारसी: सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक पथों पर अग्रसर’’ विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस समुदाय की विरासत के संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर पारसी समुदाय के इतिहास, विरासत और भारत के सामाजिक, औद्योगिक तथा परोपकारी विकास में उनके योगदान को दर्शाती एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। समुदाय की विरासत, उपलब्धियों और जनसांख्यिकी पर एक ‘कॉफी टेबल बुक’ का भी विमोचन किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने अवेस्ता भाषा के पुनरुद्धार के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों और घटती पारसी आबादी की समस्या के समाधान हेतु उठाए जा रहे उपायों का विस्तृत विवरण दिया।

उन्होंने बताया कि देश में पारसियों की संख्या अभी 52,000 से 55,000 के बीच रह गई है तथा सरकार इसे और घटने से रोकने के लिए काम कर रही है।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे टाटा परिवार ने भारत की 1920 की ओलंपिक टीम को प्रायोजित किया था और कैसे पारसियों ने 1880 के दशक में पहली भारतीय क्रिकेट टीम बनाई थी।

उन्होंने भारत की औद्योगिक और आर्थिक नींव के निर्माण में इस समुदाय के अपार योगदान की भी प्रशंसा की।

रीजीजू ने कहा, ‘‘यह सिर्फ संख्या की बात नहीं है; मायने तो प्रभाव रखता है। सरकार हर समुदाय को महत्व देती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदर्श वाक्य, ‘सबका साथ, सबका विकास’ का पालन करती है, जिसे तीसरे कार्यकाल में ‘सबका विश्वास’ और ‘सबका प्रयास’ के साथ और मजबूत किया गया है।”

मंत्री ने संगोष्ठी के प्रतिभागियों से सुझाव भी आमंत्रित किए। यह संगोष्ठी अल्पसंख्यक समुदायों की समवर्ती स्थिति पर विचार-विमर्श करने के लिए आयोग द्वारा फरवरी 2026 में शुरू की गई शैक्षणिक गतिविधियों की शृंखला का हिस्सा है।

अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा, “यह समझना महत्वपूर्ण है कि आज पारसी समुदाय को विशेष रूप से जनसंख्या स्थिरता के संबंध में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर हाल में हुई चर्चाओं में घटती जनसंख्या और बदलते सामाजिक स्वरूप जैसी चिंताओं पर ध्यान आकर्षित किया गया है। ये जटिल मुद्दे हैं, जिनके लिए नीतिगत समर्थन और सक्रिय सामुदायिक भागीदारी दोनों को शामिल करते हुए एक सुविचारित और समन्वित प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।”

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय ने राष्ट्र निर्माण में पारसी समुदाय के अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला और भारत की बहुलवादी सांस्कृतिक भावना को संरक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया।

आयोग के सदस्य बर्जिस देसाई ने भारत के विकास में पारसी समुदाय के असाधारण योगदान पर विस्तार से चर्चा करते हुए इस बात पर बल दिया कि संख्यात्मक रूप से छोटे इस समुदाय ने देश की आर्थिक, औद्योगिक, कानूनी और परोपकारी नींव को आकार देने में कितना महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

‘गोदरेज एग्रोवेट लिमिटेड’ के होर्माजद गोदरेज ने समुदाय की उद्यमशीलता और परोपकारी परंपराओं पर प्रकाश डाला और भावी पीढ़ियों के लिए इसकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

भाषा खारी सुरेश

सुरेश


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