पोलावरम-नल्लमाला सागर परियोजना में गोदावरी के अधिशेष जल का उपयोग होगा : मंत्री

पोलावरम-नल्लमाला सागर परियोजना में गोदावरी के अधिशेष जल का उपयोग होगा : मंत्री

पोलावरम-नल्लमाला सागर परियोजना में गोदावरी के अधिशेष जल का उपयोग होगा : मंत्री
Modified Date: January 11, 2026 / 06:48 pm IST
Published Date: January 11, 2026 6:48 pm IST

अमरावती, 11 जनवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश के मंत्री एन. रामनायडू ने रविवार को कहा कि प्रस्तावित पोलावरम-नल्लमाला सागर लिंक परियोजना का उद्देश्य गोदावरी नदी के उस अधिशेष जल का उपयोग करना है, जो बंगाल की खाड़ी में बह जाता है।

मंत्री ने कहा कि गोदावरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के अनुसार राज्य को शेष पानी के उपयोग का अधिकार है।

रामनायडू ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘पोलावरम-नल्लमाला सागर लिंक परियोजना का उद्देश्य गोदावरी नदी के उस अधिशेष जल का दोहन करना है, जो फिलहाल समुद्र में चला जाता है।’’

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राज्य के जल संसाधन मंत्री के अनुसार, हर साल समुद्र में बहने वाले लगभग 3,000 टीएमसी पानी में से परियोजना के तहत करीब 200 टीएमसी का उपयोग करने का प्रस्ताव है।

आंध्र प्रदेश को गोदावरी बेसिन में ‘निम्न प्रवाही’ (डाउनस्ट्रीम) तटीय राज्य बताते हुए मंत्री ने कहा कि अन्य तटीय राज्यों के अधिकारों को प्रभावित किए बिना उसे अधिशेष पानी का उपयोग करने का अधिकार है।

मंत्री ने कहा कि जो पानी समुद्र में चला जाता है, उसे परियोजना के जरिये रायलसीमा की ओर मोड़ा जाएगा, ताकि सिंचाई और खेती को बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने कानूनी टीम को उच्चतम न्यायालय में मजबूत तर्क रखने के निर्देश दिए और वरिष्ठ सिंचाई अधिकारियों से मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा।

रामनायडू ने कहा कि परियोजना की व्यवहार्यता रिपोर्ट केंद्र को सौंप दी गई है और उसके सुझावों के अनुसार इसमें संशोधन किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) निविदाएं केवल तैयारी के लिए हैं और सभी वैधानिक तथा कानूनी मंजूरियां मिलने के बाद ही परियोजना आगे बढ़ेगी।

भाषा सिम्मी सुरेश

सुरेश


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