पुलिस अदालत में सहयोग करती है, लेकिन थानों में मालिक जैसा बर्ताव करती है: उच्च न्यायालय

पुलिस अदालत में सहयोग करती है, लेकिन थानों में मालिक जैसा बर्ताव करती है: उच्च न्यायालय

पुलिस अदालत में सहयोग करती है, लेकिन थानों में मालिक जैसा बर्ताव करती है: उच्च न्यायालय
Modified Date: July 3, 2026 / 09:00 pm IST
Published Date: July 3, 2026 9:00 pm IST

मुंबई, तीन जुलाई (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने एक पुलिस अधिकारी पर लगाए गए जुर्माने को वापस लेने से इनकार करते हुए शुक्रवार को कहा कि पुलिस अदालतों के समक्ष सहयोगात्मक रवैया अपनाती है, लेकिन थानों में ‘‘मालिक’’ की तरह व्यवहार करती है। संबंधित अधिकारी पर आरोप था कि उसने बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद आरोपियों को शिकायतों की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराईं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड की पीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अदालत से पालघर के वाडा थाने के प्रभारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाने वाले जून के आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया गया था।

अतिरिक्त लोक अभियोजक मनकुंवर देशमुख ने कहा कि जिस अधिकारी पर जुर्माना लगाया गया, वह शिकायत की प्रति रोकने के लिए जिम्मेदार नहीं है, बल्कि किसी दूसरे अधिकारी ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया था।

हालांकि, पीठ ने इस स्पष्टीकरण को खारिज कर दिया और अदालत तथा थानों में पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर टिप्पणी की।

उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘यहां अदालत में तो आपके अधिकारी बहुत सहयोग करने वाले लगते हैं, लेकिन थानों में वे किसी मालिक की तरह व्यवहार करते हैं।’’

राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘हमें अपने आदेश में कोई त्रुटि नजर नहीं आती।’’

जून माह की सुनवाई में इसी पीठ ने पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपियों को शिकायत या प्राथमिकी की प्रतियां उपलब्ध नहीं कराए जाने पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि ऐसा करना कानूनन अनिवार्य है।

अदालत उन कुछ लोगों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनके खिलाफ वाडा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उनका दावा था कि वे पुलिस के सामने पेश हुए और प्राथमिकी की प्रति मांगी, लेकिन थाना प्रभारी ने उन्हें ये प्रति नहीं दी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उसके समक्ष ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें जिन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें शिकायत या प्राथमिकी की प्रति प्राप्त करने के लिए अदालत का रुख करने को मजबूर होना पड़ा, क्योंकि पुलिस अधिकारी उन्हें ये दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर देते हैं।

भाषा आशीष सुरेश

सुरेश


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