नीति हमेशा कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के पक्ष में नहीं होनी चाहिए: चंद्रबाबू नायडू

नीति हमेशा कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के पक्ष में नहीं होनी चाहिए: चंद्रबाबू नायडू

नीति हमेशा कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के पक्ष में नहीं होनी चाहिए: चंद्रबाबू नायडू
Modified Date: February 8, 2026 / 07:19 pm IST
Published Date: February 8, 2026 7:19 pm IST

(अमनप्रीत सिंह)

अमरावती, आठ फरवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने रविवार को कहा कि देश के कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को केंद्र के कर राजस्व बंटवारे में अधिक हिस्सा मिल रहा है, जिसका नुकसान आंध्र प्रदेश जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को उठाना पड़ रहा है।

हालांकि, नायडू ने यह भी माना कि पिछड़े राज्यों का धीरे-धीरे बेहतर प्रदर्शन की ओर बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है।

नायडू ने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए साक्षात्कार में कहा कि देश की समृद्धि तभी संभव है जब उसके सभी क्षेत्र आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि राज्य एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं।

नायडू ने कहा, ‘केंद्र सरकार जानबूझकर कोई अन्याय नहीं करना चाहती। पिछड़ेपन, जनसंख्या जैसे कुछ मापदंड हैं। दक्षिण भारत ने जनसंख्या नियंत्रण में प्रगति की है।’

उन्होंने कहा, ‘आर्थिक सुधारों के कारण दक्षिण भारत ने प्रौद्योगिकी और वृद्धि दर में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। दक्षिण भारत में प्रति व्यक्ति आय बहुत अधिक है। इसी कारण विकेंद्रीकरण एक समस्या है। जनसंख्या आधारित गरीबी विकेंद्रीकरण के मानदंडों में से एक है।’

उन्होंने कहा, ‘ऐसी स्थिति में स्वाभाविक रूप से असंतोष पैदा होगा। हमारी नीतियां हमेशा कमजोर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के पक्ष में नहीं होनी चाहिए। कुछ समय के लिए संरक्षण देना ठीक है, लेकिन अंततः सभी राज्यों को प्रदर्शन करना होगा।’

नायडू ने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि अब सभी राज्य आगे बढ़ रहे हैं और यह संबंधित राज्य सरकारों और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे बेहतर काम करें।’

उन्होंने कहा कि जनसंख्या को लेकर मौजूदा सोच अब जनसंख्या नियंत्रण से बदलकर जनसंख्या प्रबंधन की ओर बढ़ गई है।

नायडू ने कहा, ‘हम अब बढ़ती उम्र वाली आबादी और अकेलेपन की समस्या का सामना कर रहे हैं। देखिए यूरोप, जापान और दक्षिण कोरिया में क्या हो रहा है। मैंने सबसे पहले कहा था कि हमारे लोगों को अधिक बच्चे पैदा करने चाहिए, जिसके बाद (आरएसएस प्रमुख) मोहन भगवत और (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री) एम.के. स्टालिन ने भी यही बात कही।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भविष्य में कभी केंद्रीय राजनीति में अपनी कोई भूमिका देखते हैं, तो तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के अध्यक्ष ने इस संभावना से इनकार कर दिया।

उन्होंने कहा, “मैंने केंद्र में किसी भी भूमिका की कभी अपेक्षा नहीं की। मैं हमेशा आंध्र प्रदेश में काम करने के लिए इच्छुक रहा हूं, चाहे वह संयुक्त आंध्र प्रदेश हो या अब नया आंध्र प्रदेश।

नायडू ने कहा, ‘1995 में जब मैं मुख्यमंत्री बना, तब हैदराबाद एक कृषि प्रधान राज्य था। मैंने सोच-समझकर एक प्रौद्योगिकी और औद्योगिक परिवेश का निर्माण किया। आज तेलंगाना प्रति व्यक्ति आय के मामले में सबसे समृद्ध राज्य है। अब मैं एक और राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। लेकिन मुझे संतोष है कि मैंने एक आदर्श राज्य का निर्माण किया है। मैंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है और यह जारी रहेगा।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के सुचारू रूप से काम करने का श्रेय उनकी पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (राजग) के अन्य घटकों को जाता है, जैसा कि पिछले दो कार्यकालों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास अकेले बहुमत होने पर हुआ था, तो नायडू ने कहा कि समर्थन पारस्परिक है।

उन्होंने कहा, ‘हम भारत सरकार का समर्थन करते हैं। बदले में वे भी हमें समर्थन दे रहे हैं। इसीलिए हम इसे ‘डबल इंजन सरकार’ कहते हैं। भारत सरकार और आंध्र प्रदेश सरकार की नीतियों में कोई मतभेद नहीं है।’

भाषा योगेश नरेश

नरेश


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