यूजीसी नियमों पर आरएसएस नेता आंबेकर ने कहा, संघ समाज में एकता के पक्ष में

यूजीसी नियमों पर आरएसएस नेता आंबेकर ने कहा, संघ समाज में एकता के पक्ष में

यूजीसी नियमों पर आरएसएस नेता आंबेकर ने कहा, संघ समाज में एकता के पक्ष में
Modified Date: February 3, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: February 3, 2026 6:21 pm IST

(फोटो सहित)

मुंबई, तीन फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय द्वारा यूजीसी नियमावली पर रोक लगाए जाने के बीच, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संगठन (आरएसएस) के एक वरिष्ठ नेता ने मंगलवार को कहा कि उनका संगठन समाज में एकता के पक्ष में है और इसे बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेगा।

स्वतंत्रता संग्राम में आरएसएस के योगदान पर सवाल उठाने वालों की आलोचना का जवाब देते हुए अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि संघ को 100 साल बाद यह बताने की जरूरत नहीं है कि उसने देश की संप्रभुता और एकता को बनाए रखने के लिए क्या किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘संघ का गठन भी इसी उद्देश्य से हुआ। संघ ने जो कुछ भी किया है, वह देश के लिए ही किया है।’’

पिछले महीने, केंद्र ने नए नियम अधिसूचित किए, जिनके अनुसार सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए ‘‘समता समितियां’’ गठित करनी होंगी। इस नियम को लेकर प्रदर्शन शुरू हो गए।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 में यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांग और महिला सदस्य शामिल होने चाहिए।

उच्चतम न्यायालय ने शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के समता संबंधी नियमों पर यह कहते हुए रोक लगा दी कि ढांचा ‘प्रथम दृष्टया अस्पष्ट’ है, इसके ‘बहुत व्यापक परिणाम’ हो सकते हैं और अंततः यह समाज को विभाजित कर सकता है, जिसके खतरनाक प्रभाव होंगे।

आंबेकर ने यूजीसी के नियमों से संबंधित एक प्रश्न पर कहा, ‘‘अदालत ने दिशा-निर्देशों पर रोक लगा दी है। विभिन्न लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए हैं और मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। संघ का मानना ​​है कि समाज में एकता होनी चाहिए। हम सभी एकता बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक होगा, वह करेंगे।’’

‘शहर को हरे रंग में रंगने’ से जुड़े हालिया विवाद के बारे में पूछे जाने पर आंबेकर ने कहा कि देश का रंग हजारों वर्षों से भगवा रहा है।

ठाणे में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की एक पार्षद ने कहा था कि उनकी पार्टी मुंब्रा को हरे रंग से रंग देगी।

हाल में संपन्न महानगरपालिका चुनावों में भाषा की महत्वपूर्ण भूमिका के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आरएसएस का रुख यह रहा है कि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।

उन्होंने कहा कि देश की परंपरा रही है कि सभी भाषाएं एक साथ खुशी-खुशी फलती-फूलती हैं। आंबेकर ने कहा, ‘‘देश के लोगों ने इतनी सारी भाषाओं को संरक्षित किया है और वे फली-फूली हैं। यही हमारा इतिहास है। अगर लोग (देश में भाषा के) इतिहास को भूल जाएंगे, तो समस्याएं उत्पन्न होंगी।’

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने महानगरपालिका चुनावों में मराठी भाषा और अस्मिता को एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था।

भाषा आशीष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में