महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने पर शिवसेना का विरोध प्रदर्शन

महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने पर शिवसेना का विरोध प्रदर्शन

महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने पर शिवसेना का विरोध प्रदर्शन
Modified Date: April 18, 2026 / 07:46 pm IST
Published Date: April 18, 2026 7:46 pm IST

मुंबई, 18 अप्रैल (भाषा) विधायिकाओं में महिलाओं को आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में एक दिन पहले पारित नहीं होने के बाद शिवसेना के नेताओं ने शनिवार को यहां विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान शिवसेना नेता एवं विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे तथा मनीषा कायंदे ने विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीरों को पैरों तले रौंदा।

गोरहे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पोस्टर को फाड़ दिया। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री के पोस्टर पर चप्पलों से वार किया।

गोरहे ने कहा कि कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के अन्य दलों ने महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करने का दावा किया, लेकिन लोकसभा में विधेयक के खिलाफ मतदान किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष यह झूठा विमर्श फैला रहा है कि यह विधेयक उत्तर और दक्षिण भारत के बीच तनाव पैदा करता है।

गोरहे ने दावा किया कि यदि केंद्र सरकार ने विपक्षी नेताओं के साथ ‘फ्लोर मैनेजमेंट’ के लिए शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे को शामिल किया होता, तो यह विधेयक पारित हो सकता था। मनीषा कायंदे ने कहा कि विधेयक पारित नहीं होने के बाद विपक्षी दलों की सच्चाई उजागर हो गई है।

इस बीच, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता अतुल लोंढे ने गोरहे पर तीखा हमला करते हुए उन पर “राजनीतिक लाभ के लिए अपने संवैधानिक पद की गरिमा गिराने” का आरोप लगाया।

लोंढे ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान गोरहे द्वारा राहुल गांधी का पोस्टर फाड़ना उनकी तरफ से एक और कार्यकाल पाने की हताशापूर्ण कोशिश है।

गोरहे का परिषद में कार्यकाल समाप्त हो चुका है और अगले महीने द्विवार्षिक चुनाव होने वाले हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद सदन में प्रधानमंत्री के समकक्ष एक संवैधानिक पद है। ऐसे में आपके जैसे पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा एमएलसी सीट के लिए जूतों से तस्वीर पर प्रहार करना निराशाजनक है।”

लोंढे ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध करती है। उन्होंने दावा किया कि परिसीमन के जरिए उत्तर-दक्षिण विभाजन पैदा करना देश की एकता के लिए खतरा है।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 के संसदीय चुनावों से लागू करने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो पाया।

सदन में ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।

लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है।

विधेयक पर मत विभाजन में 528 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इस विधेयक को पारित करने के लिए 352 सदस्यों के समर्थन की आवश्यकता थी।

भाषा रविकांत दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में