तिरुपति लड्डू विवाद : आंध्र प्रदेश के मंत्री ने वाईएसआरसीपी के क्लीन चिट के दावे को खारिज किया
तिरुपति लड्डू विवाद : आंध्र प्रदेश के मंत्री ने वाईएसआरसीपी के क्लीन चिट के दावे को खारिज किया
अमरावती, 31 जनवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश सरकार ने तिरुपति लड्डू विवाद को लेकर युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजे गए घी के नमूनों में पशु चर्बी होने की आशंका जताई गई है।
राज्य सरकार ने विपक्षी दल पर पवित्र तिरुमला मंदिर के अधिष्ठाता देवता श्री वेंकटेश्वर स्वामी में आस्था न रखने का आरोप भी लगाया है।
आंध्र प्रदेश के वित्त मंत्री पी. केशव ने शनिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की ओर से राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) को भेजे गए घी के नमूनों की रिपोर्ट में पशु चर्बी होने की आशंका साफ तौर पर जताई गई थी और मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने भी इसी रिपोर्ट का हवाला दिया था।
तिरुपति लड्डू विवाद में नायडू ने आरोप लगाया था कि दुनिया के सबसे धनी मंदिरों में से एक तिरुपति में लाखों श्रद्धालुओं द्वारा पसंद की जाने वाली इस मिठाई को बनाने में मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया था। नायडू के इन दावों को लेकर काफी विवाद हुआ था।
केशव ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार ने टीटीडी लड्डू के लिए घी की खरीद को सिर्फ एक व्यापारिक सौदे की तरह देखा और उन्हें भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी में आस्था नहीं है।
उन्होंने कहा, “जब ऐसा सनसनीखेज मामला सरकार के संज्ञान में आता है, तो क्या इसे जनता को नहीं बताया जाना चाहिए या 2022 की तरह दबा दिया जाना चाहिए? एक जिम्मेदार व्यक्ति के तौर पर मुख्यमंत्री नायडू ने इसे एक आंतरिक बैठक में सामने रखा।”
वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि 2022 में मैसूरु स्थित केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) को भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट में भी घी के मिलावटी होने की बात सामने आई थी, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सरकार ने इस रिपोर्ट को दबा दिया।
केशव ने कहा कि एनडीडीबी को भेजे गए घी के नमूनों की रिपोर्ट में पशु चर्बी होने की आशंका साफ तौर पर जताई गई थी और मुख्यमंत्री नायडू ने भी इसी रिपोर्ट का हवाला दिया था।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड ने घी की खरीद के लिए निविदा शर्तों में बदलाव किया जिससे कम कारोबार वाली छोटी कंपनियों के लिए रास्ता खुल गया।
मंत्री ने कहा कि राज्य के विभाजन के तुरंत बाद, 2014 में मुख्यमंत्री नायडू के नेतृत्व में नयी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) सरकार का गठन हुआ और इसने घी में किसी भी प्रकार की मिलावट को रोकने तथा इस तरह की कुप्रथा को रोकने के लिए टीटीडी में कई बदलाव किए।
केशव ने दावा किया, ‘‘इसलिए, उन्होंने टीटीडी में घी की खरीद प्रणाली को मजबूत किया है। वर्ष 2019 में जब जगन मोहन रेड्डी सरकार सत्ता में आई, तो पहले तीन महीनों में उन्होंने सबसे पहले इन सभी शर्तों को शिथिल कर दिया।’’
केशव के अनुसार, पिछली शर्त यह थी कि घी की आपूर्ति करने की इच्छुक किसी भी कंपनी के पास डेयरी व्यवसाय में कम से कम तीन साल का अनुभव होना चाहिए, कम से कम 250 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज होना चाहिए, गुणवत्तापूर्ण परिसर होना चाहिए और इसके अलावा उन्हें उस विशेष वर्ष में कम से कम चार लाख लीटर दूध की खरीद करनी चाहिए।
तेदेपा नेता ने आरोप लगाया, ‘‘ जगन सरकार के सत्ता में आते ही ये सभी स्थितियां कमजोर पड़ गईं। यहीं से सभी घोटालों के बीज बोए गए।’’
मंत्री के मुताबिक, इन मानदंडों को 150 करोड़ रुपये के कारोबार और सिर्फ एक साल के अनुभव तक सीमित कर दिया गया, जिससे अनियमितताओं और मिलावट की नींव पड़ी।
केशव ने बताया कि एसआईटी के सामने मौजूद सबूतों से पता चलता है कि मिलावट 2019 के बाद ही शुरू हुई।
उन्होंने कहा कि 2022 में, मैसूरु स्थित सीएफटीआरआई ने मिलावट की पुष्टि करते हुए रसायन, बीटा-सिटोस्टेरॉल, पशु चर्बी और अन्य अवशिष्ट पदार्थों का पता लगाया।
केशव ने कहा कि इस मामले में आरोपपत्र दाखिल कर चुके विशेष जांच दल (एसआईटी) ने साफ किया है कि घी में मिलावट से जुड़ी यह “धोखाधड़ी” करीब 240 करोड़ रुपये की है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीटीडी के तत्कालीन अध्यक्ष वाई वी सुब्बा रेड्डी के निजी सहायक ने डेयरी कंपनियों से करीब चार करोड़ रुपये प्राप्त किए और इस राशि को अन्य खातों में अंतरित कर दिया गया।
हाल में एसआईटी ने नेल्लूर की एसीबी अदालत में अंतिम आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसमें घी में मिलावट के मामले में टीटीडी के नौ अधिकारियों, पांच डेयरी विशेषज्ञों सहित कुल 36 लोगों पर अभियोग तय किए गए हैं।
मुख्यमंत्री नायडू ने सितंबर 2024 में आरोप लगाया था कि राज्य में पूर्ववर्ती सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में पशु चर्बी वाले घी का इस्तेमाल किया गया, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था।
राज्य में 2024 में हुई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की विधायक दल की बैठक के दौरान नायडू ने आरोप लगाया था कि पूर्ववर्ती वाईएसआरसीपी सरकार ने श्री वेंकटेश्वर मंदिर को भी नहीं बख्शा और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े लड्डू बनाने में घटिया सामग्री और पशु चर्बी वाले घी का उपयोग किया गया।
इन आरोपों के बाद पूरे देश में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत होने का दावा किया गया।
भाषा रवि कांत रवि कांत दिलीप
दिलीप

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