पर्यावरणविदों ने उज्जैन में बर्ड टावरों के विरोध में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
पर्यावरणविदों ने उज्जैन में बर्ड टावरों के विरोध में मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
भोपाल, 11 अगस्त (भाषा) पर्यावरणविदों ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर उज्जैन में ‘बर्ड टावर’ के निर्माण का विरोध किया है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाले पक्षियों को ऐसी सुविधा प्रदान करना ‘अप्राकृतिक और अव्यावहारिक’ है।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में गैर सरकारी संगठन द नेचर वॉलंटियर्स (टीएनवी) सोसायटी ने दावा किया कि नवंबर 2021 में जारी राज्य सरकार के आदेश के मानदंडों का उल्लंघन करते हुए उज्जैन में ऐसे कई टावर बनाए जा रहे हैं।
सोसायटी के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे ने पत्र में कहा, ‘‘अनुभव से पता चला है कि ‘उड़ने वाले चूहे’, जैसा कि भारतीय चट्टानी कबूतरों को कहा जाता है, इन टावरों पर कब्जा कर लेंगे, न तो राज्य पक्षी पैराडाइस फ्लाई कैचर और न ही गोल्डन ओरियोल वहां घोंसला बनाने जाएंगे, जल पक्षियों या विभिन्न वृक्षीय प्रजातियों की तो बात ही छोड़िए।’’
वन्यजीव विशेषज्ञ और भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पूर्व अधिकारी सुहास कुमार ने कहा कि रॉक कबूतरों में खतरनाक बैक्टीरिया और एक विशेष प्रकार का प्रोटीन होता है, जो मानव फेफड़ों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाता है।
पर्यावरणविद् अभिलाष खांडेकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ गुजरात में पक्षियों के लिए सीमेंट कंक्रीट से बने ढांचे का चलन नया है। नेचर वॉलंटियर्स ने इसका विरोध किया और राज्य सरकार से 2021 में बर्ड टावरों के निर्माण को हतोत्साहित करने और प्रतिबंधित करने का आधिकारिक आदेश जारी करवाया।’’
उज्जैन के वार्ड 27 के पार्षद गोपाल बलवानी ने बताया कि वसंत विहार और मुनि नगर के पास 315-315 पक्षियों के लिए बर्ड टावर बनाए गए हैं।
उज्जैन के जिलाधिकारी नीरज कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति या गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने ऐसे टावरों का निर्माण किया होगा, लेकिन सरकार की ऐसी कोई योजना नहीं है।
भाषा रवि कांत रवि कांत रंजन
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