World Hindi Day 2026 / image credit: IBC24 File
आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसे दिन की जो हमारी मातृभाषा हिंदी को दुनिया के पटल पर चमकाने का मौका देता है। हिंदी! वह मधुर स्वरों की सरिता, जो हिमालय की बर्फीली चोटियों से निकलकर सागर की गहराइयों तक बहती है, और रास्ते में हर दिल को अपनी मिठास से सराबोर कर देती है। आज, जब सूरज की किरणें 10 जनवरी 2026 को छू रही हैं, विश्व हिंदी दिवस 2026 (World Hindi Day 2026) हर साल 10 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिवस इस साल भी धूम धाम से सेलिब्रेट किया जा रहा है। हमारी हिन्दी भाषा की उस अनंत यात्रा का प्रतीक है, जो प्राचीन वेदों की ऋचाओं से लेकर आधुनिक डिजिटल युग की ध्वनियों तक फैली है।
विश्व हिंदी दिवस की जड़ें 1975 में जाती हैं, जब महाराष्ट्र के नागपुर शहर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ। इस सम्मेलन में भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों से हिंदी विद्वान, लेखक और भाषा प्रेमी इकट्ठा हुए। इसका मुख्य मकसद था विदेशों में बसे हिंदी भाषियों को एकजुट करना और हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयास करना। उस समय से ही 10 जनवरी को हिंदी के वैश्विक महत्व को मान्यता मिली। लेकिन आधिकारिक तौर पर विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत 2006 में हुई। यह फैसला 1975 के उस ऐतिहासिक सम्मेलन की याद में लिया गया।
तब से लेकर अब तक, विश्व हिंदी सम्मेलन दुनिया के अलग-अलग कोनों में हो चुके हैं जैसे पोर्ट लुईस (मॉरीशस), स्पेन, लंदन, न्यूयॉर्क और जोहानसबर्ग। इन सम्मेलनों ने हिंदी को सिर्फ भारत की भाषा से बाहर निकालकर वैश्विक पहचान दी। World Hindi Day 2026 इस परंपरा को आगे बढ़ाएगा, जहां हम हिंदी की जड़ों को मजबूत करते हुए उसके भविष्य की बात करेंगे। क्या आप जानते हैं कि हिंदी दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है? भारत के अलावा नेपाल, फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देशों में लाखों लोग इसे बोलते और समझते हैं।
हर साल World Hindi Day की एक खास थीम होती है, जो हिंदी के अलग-अलग पहलुओं पर फोकस करती है। विश्व हिंदी दिवस 2026 की थीम है ‘हिंदी: पारंपरिक ज्ञान से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक’। एक तरफ हिंदी हमारी प्राचीन संस्कृति, वेदों, उपनिषदों और रामायण-महाभारत जैसे ग्रंथों से जुड़ी है, जहां पारंपरिक ज्ञान की धारा बहती है। दूसरी तरफ, आज के डिजिटल युग में हिंदी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के साथ जोड़ना।
कन्यादान (Kanyadaan): हिंदू विवाह में पिता द्वारा बेटी को दूल्हे को ‘सौंपने’ की रस्म। ‘Giving away the bride’ अधूरा है, क्योंकि इसमें पवित्र जल, भावनात्मक बंधन और पीढ़ियों की विरासत छिपी है।
राखी (Rakhi): बहन द्वारा भाई की कलाई पर बांधा जाने वाला धागा। अंग्रेजी के ‘Bracelet’ या ‘sibling bond’ से परे, यह रक्षा, प्यार और त्योहार की मिठास का प्रतीक है।
मोक्ष (Moksh): जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, आत्मा की शांति। ‘Liberation’ या ‘salvation’ में वह आध्यात्मिक ऊंचाई नहीं, जो हिंदू दर्शन में कर्म और पुनर्जन्म से जुड़ी है।
जिजीविषा (Jijivisha): जीवन जीने की गहरी इच्छा, पूरे उत्साह से। ‘Will to live’ अधूरा लगता है, क्योंकि इसमें आशा, संघर्ष और पूर्णता का मिश्रण है।
जुगाड़ (Jugad): यह देसी क्रिएटिविटी का प्रतीक है। कोई समस्या हो, तो जुगाड़ से हल निकाल लेना। अंग्रेजी में ‘हैक’ या ‘एडजस्टमेंट’ कह सकते हैं, लेकिन वह भावना कहां?
श्रद्धा (Shraddha): समर्पण, विश्वास और भक्ति का मिश्रण। ‘रिस्पेक्ट’ या ‘फेथ’ अधूरा लगता है।
लाज (Laaj): समाज में सम्मान और शर्म का वह भाव। ‘शेम’ या ‘मॉडेस्टी’ से अलग।
तसल्ली (tasalli): मन की शांति और सुकून। ‘सैटिस्फैक्शन’ से ज्यादा गहरा आराम।
कई लोग विश्व हिंदी दिवस को राष्ट्रीय हिंदी दिवस से कन्फ्यूज कर लेते हैं। राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है, जो 1949 में हिंदी को राजभाषा बनाने की याद में है। जबकि विश्व हिंदी दिवस वैश्विक है, जो हिंदी को दुनिया में फैलाने पर फोकस करता है।