राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने के बाद मेरा लक्ष्य पावरप्ले का फायदा उठाने का था: सूर्यवंशी
राजस्थान रॉयल्स से जुड़ने के बाद मेरा लक्ष्य पावरप्ले का फायदा उठाने का था: सूर्यवंशी
जयपुर, 30 मार्च (भाषा) इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के बीते सत्र में ऐतिहासिक पदार्पण के बाद राजस्थान रॉयल्स के उभरते हुए प्रतिभाशाली बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी का मौजूदा सत्र में लक्ष्य गेंदबाजों पर हावी होकर पावरप्ले में दबदबा कायम करना है।
इस 15 साल के बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज ने पिछले सत्र में सात मैचों में 252 रन बनाए थे। इसमें 35 गेंदों में जड़ा गया तूफानी शतक और 200 से अधिक का स्ट्राइक रेट शामिल था। इस तरह के आंकड़ों ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का बड़ा सितारा बना दिया।
सूर्यवंशी का मानना है कि पावरप्ले में आक्रामक शुरुआत करने के बाद अब उनका लक्ष्य अपने विकेट की कीमत समझते हुए टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचाना है, ताकि विरोधी टीम के लिए लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल हो जाए।
उन्होंने ‘जियोस्टार’ से कहा, “जब मेरा चयन हुआ, तो मेरा एकमात्र लक्ष्य टीम को अच्छी शुरुआत देना था। मैं पावरप्ले में अपना स्वाभाविक खेल खेलना चाहता था और अगर अच्छी शुरुआत मिलती, तो विकेट बचाते हुए लंबी पारी खेलना चाहता था।”
उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि अगर मैं अपने शॉट्स सही से खेलता रहूं, तो मैच का रुख पलट सकता है क्योंकि 200 से अधिक रन का पीछा करना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता। इस सत्र में हमारा लक्ष्य ट्रॉफी जीतना है। अगर हम ट्रॉफी जीतते हैं तो मेरा और टीम का प्रदर्शन अपने आप चर्चा में आ जाएगा और यही सबसे अहम है।”
आईपीएल में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी सूर्यवंशी ने इसी साल अंडर-19 विश्व कप फाइनल में 175 रनों की धमाकेदार पारी भी खेली थी।
सूर्यवंशी ने यह भी बताया कि बचपन में जिन दो खिलाड़ियों से वह सबसे ज्यादा प्रेरित हुए, वे वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा और भारत के विश्व कप विजेता स्टार युवराज सिंह हैं। लारा अपनी मैच जिताऊ टेस्ट पारियों के लिए मशहूर रहे, वहीं युवराज सिंह अपने बेखौफ शॉट्स से गेंदबाज़ों की धज्जियां उड़ाने के लिए जाने जाते हैं।
उन्होंने कहा, “मैंने ब्रायन लारा और युवराज सिंह, दोनों को अकेले दम पर मैच खत्म करते देखा है। अगर वे क्रीज पर टिक जाते थे तो विरोधी टीम के लिए वापसी का कोई मौका नहीं होता था। मुझे उनकी यही बात सबसे ज्यादा पसंद आई।”
सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने बताया कि अकादमी में आने के समय उनकी सबसे खास बात उनका निडर, आक्रामक रुख और बेहतरीन टाइमिंग थी।
उन्होंने कहा, “2018 में जब वह अकादमी में आए, तभी साफ था कि उनमें प्रतिभा और क्रिकेट के प्रति गहरा जुनून है। उन्हें बल्लेबाजी के दौरान आक्रामक खेल पसंद था और उनकी टाइमिंग शानदार थी। हर सत्र में वह 400-500 गेंदें खेलते थे और तब तक नहीं रुकते थे, जब तक मैं उन्हें ब्रेक नहीं दूं।”
भाषा आनन्द नमिता
नमिता

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