नई दिल्लीः Parliament Debates on Naxalism: लोकसभा में देश को वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा हो रही है। यह चर्चा नक्सलवाद को खत्म करने के लिए सरकार की दी गई 31 मार्च की समय सीमा समाप्त होने से एक दिन पहले हो रही है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश ने “रेड कॉरिडोर से ग्रोथ कॉरिडोर” तक का सफर तय किया है, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों ने इस समस्या को लंबे समय तक बनाए रखा।
पात्रा ने अपने संबोधन में लेखिका अरुंधति रॉय के उस बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने नक्सलियों को “गांधियंस विद गन” बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर नक्सलवाद को लेकर दोहरी विचारधारा रही और केवल “लिप सर्विस” दी जाती रही, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने अप्रैल 2010 में 76 CRPF जवानों के शहीद होने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सरकार नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण नहीं कर पाई। साथ ही, नवंबर 2013 में तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर शपथ पत्र का हवाला देते हुए कहा कि सरकार को “अर्बन नक्सल” की जानकारी थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) में “अर्बन नक्सल” से जुड़े लोग शामिल थे। उन्होंने 2011 में कलेक्टर आर. वीनकृष्णन और एक इंजीनियर के अपहरण की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें छुड़ाने के लिए आठ माओवादियों को रिहा करने की बातचीत की गई थी। ए पद्मा माओवादी थी, वो हर्ष मंदार NAC सदस्य के ऑर्फेनेज चलाती थी। सीधे तौर पर ए पद्मा कांग्रेस से जुड़ी हुई थी।
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कांग्रेस पर जमकर साधा निशाना
सलवा जुडूम को लेकर भी पात्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की थी और इसे राजनीति से ऊपर उठकर चलाने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि पुनर्वास केंद्र रमन सिंह की सरकार ने शुरू किया था। गांव के लोग जीत रहे थे, कांग्रेस के दरबारियों ने SC में याचिका डाली। बाद में इस पहल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जिससे नक्सल विरोधी अभियान को नुकसान हुआ। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर की याचिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कारण सलवा जुडूम समाप्त हो गया। पात्रा ने कहा कि नंदिनी सुंदर पर हत्या का केस था। भूपेश बघेल की सरकार के दौरान उनसे जुड़े मामलों को वापस लिया गया। वहीं सलवा जुडूम को भी सुप्रीम कोर्ट ने हटा दिया, नहीं नक्सलवाद 6 साल पहले ही खत्म हो जाता। पात्रा ने 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के दरभा घाटी में हुए नक्सली हमले का जिक्र करते हुए दावा किया कि सलवा जुडूम खत्म करवाने को लेकर महेंद्र कर्मा ने कहा था कि मुझे छोड़ा नहीं जाएगा और आखिरकार ये घटना हुई कि 25 मई 2013 को नक्सलियों ने दरभा घाटी में कांग्रेस के काफिले पर हमला कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेसियों ने अपने ही लोगों को मरवा दिया।
https://www.youtube.com/watch?v=BTdd9HiGywg
https://www.youtube.com/watch?v=1jUrfSObD_k
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