बिली जीन किंग ने 82 साल की उम्र में हासिल की स्नातक की डिग्री
बिली जीन किंग ने 82 साल की उम्र में हासिल की स्नातक की डिग्री
लॉस एंजिलिस, 18 मई (एपी) बिली जीन किंग ने उपलब्धि हासिल करने की खुशी में अपना दाहिना हाथ उठाया, लेकिन यह उपलब्धि टेनिस कोर्ट पर एक और जीत नहीं थी। इस बार वह कॉलेज में अपने नामांकन के 65 वर्ष बाद डिग्री हासिल करने का जश्न मना रही थीं।
टेनिस जगत की दिग्गज और समानता की पैरोकार किंग ने सोमवार को 82 वर्ष की आयु में अपनी अधूरी पढ़ाई पूरी करते हुए ‘कैल स्टेट लॉस एंजिलिस’ से इतिहास विषय में स्नातक की डिग्री प्राप्त की।
श्राइन ऑडिटोरियम में आयोजित दीक्षांत समारोह में लगभग 6,000 विद्यार्थियों के साथ किंग ने मंच पर कदम रखा। गुलाबी चश्मा, नीले स्पोर्ट्स शूज़ और काले गाउन में पहुंची किंग का उत्साह देखते ही बन रहा था।
उन्होंने समारोह के बाद कहा, “उम्र चाहे जो भी हो और परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि आप कुछ हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए आगे बढ़िए। सीखने में कभी देर नहीं होती।”
उनके गाउन पर सुनहरे रंग का विशेष स्टोल था, जिसे एक मित्र ने खास तौर पर तैयार कराया था। एक ओर उनके नाम के शुरुआती अक्षरों के साथ “जी.ओ.ए.टी.” लिखा था, जिसका अर्थ है ‘सर्वकालिक महान खिलाड़ी’, जबकि दूसरी ओर रंग-बिरंगा टेनिस रैकेट कढ़ाई से बनाया गया था।
उन्होंने कार्यक्रम के बाद कहा, “यह मेरे लिए मेरी सोच से कहीं अधिक मायने रखता है। मुझे बहुत खुशी है कि मैंने ऐसा किया। मुझे उम्मीद है कि कोई और व्यक्ति भी दोबारा स्कूल जाना शुरू करेगा।”
किंग ने दो वर्ष पहले अपनी डिग्री पूरी करने की घोषणा की थी। यही वह विश्वविद्यालय है, जहां शारीरिक शिक्षा भवन के बाहर उनकी कांस्य प्रतिमा स्थापित है। वह कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने वाली अपने परिवार की पहली सदस्य बनीं। विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में हिस्पैनिक (स्पेनिश भाषा बोलने वाले) और लैटिनो (लैटिन अमेरिकी देशों से जुड़े) छात्र पढ़ते हैं।
समारोह में अपने संबोधन के दौरान किंग ने 1960 के दशक में महिला खिलाड़ियों के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा, “उस समय महिला खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति नहीं मिलती थी, जबकि मेरे मित्र अर्थर ऐश और स्टान स्मिथ पुरुष टीमों में छात्रवृत्ति पर पढ़ते थे।”
उन्होंने समानता और समावेशन की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा, “जब तक कोई व्यक्ति बहिष्कार का अनुभव नहीं करता, वह समावेशन का सही अर्थ नहीं समझ सकता।”
किंग के भाषण के दौरान जब बालकनी में एक बच्चा रोने लगा, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “क्या मेरा भाषण इतना खराब है?” इस पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा।
उन्होंने “सी से पुएदे” का नारा लगाया, जिसका अर्थ है, “हाँ, आप कर सकते हैं,” और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम के अंत में किंग ने छात्र खिलाड़ियों और विश्वविद्यालय के शुभंकर के साथ दर्शकों की ओर हस्ताक्षरित टेनिस गेंदें भी उछालीं।
किंग ने 1961 में इसी विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था। उसी वर्ष उन्होंने विम्बलडन में अपना पहला महिला युगल खिताब जीता था। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा, “आज विम्बलडन में युगल खिताब जीतने पर लाखों डॉलर मिलते हैं, लेकिन 1961 में हमें केवल 45 डॉलर का गिफ्ट वाउचर मिला था।”
इसके बाद उन्होंने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी बनने के लक्ष्य के लिए पढ़ाई छोड़ दी।
अपने करियर में उन्होंने 39 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते और 1973 के ऐतिहासिक ‘बैटल ऑफ द सेक्सेस’ मुकाबले में बॉबी रिग्स को हराकर इतिहास रचा।
महिला टेनिस को पेशेवर पहचान दिलाने और महिला खिलाड़ियों के लिए बेहतर पुरस्कार राशि व अवसर सुनिश्चित करने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
किंग ने स्वीकार किया कि डिग्री अधूरी रह जाने का एहसास हमेशा उन्हें खलता था। वे अक्सर अपनी जीवनी में “स्नातक” शब्द लिखे जाने पर उसे ठीक करवाती थीं।
उन्होंने कहा, “मैं हमेशा कहती थी कि मैंने अभी डिग्री हासिल नहीं की है। लेकिन आज पहली बार लोग सचमुच कह सकते हैं कि मैं स्नातक बन गई हूँ।”
जब उनसे पूछा गया कि क्या अब वे मास्टर डिग्री (परास्नातक) भी करना चाहेंगी, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, “मैंने अभी-अभी समाचार देखा और शाक (दिग्गज बास्केटबॉल खिलाड़ी शाकिल ओ’नील) एलएसयू में मास्टर डिग्री लेते हुए नजर आ रहे हैं। मुझे लगता है कि सीखते रहना बहुत अच्छी बात है।”
एपी आनन्द सुधीर
सुधीर

Facebook


