संविधान में बदलाव के मामले में अदालत ने एआईटीए की आमसभा के अधिकार को बरकरार रखा

संविधान में बदलाव के मामले में अदालत ने एआईटीए की आमसभा के अधिकार को बरकरार रखा

संविधान में बदलाव के मामले में अदालत ने एआईटीए की आमसभा के अधिकार को बरकरार रखा
Modified Date: June 23, 2026 / 12:32 pm IST
Published Date: June 23, 2026 12:32 pm IST

(अमनप्रीत सिंह)

नयी दिल्ली, 23 जून (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने संविधान में बदलाव के मामले में अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की आमसभा की अहमियत को दोहराते हुए निर्देश दिया है कि प्रस्तावित बदलावों को महासंघ के सदस्यों के सामने रखा जाए ताकि वे हर प्रावधान पर विचार करके मतदान कर सकें।

न्यायमूर्ति तेजस कारिया और मधु जैन की खंडपीठ ने एआईटीए और पूर्व डेविस कप खिलाड़ी सोमदेव देववर्मन द्वारा 27 अप्रैल के एकल न्यायाधीश के फैसले के खिलाफ दायर क्रॉस अपीलों पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया ।

अदालत ने कहा कि अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक एआईटीए के संविधान और नियमों में बदलाव के मसौदे और उप नियमों को अंतिम रूप देने के बाद 31 जुलाई तक महासंघ की आमसभा की विशेष बैठक बुलाई जानी चाहिए, जिसमें आमसभा हर प्रस्तावित बदलाव पर चर्चा और मतदान करेगी।

पीठ ने यह भी कहा कि हर प्रस्ताव को स्वीकार करने, खारिज करने या उसमें बदलाव के कारणों को भी बैठक की रिपोर्ट में शामिल किया जायेगा ।

यह आदेश एकल न्यायाधीश के फैसले के कुछ हिस्सों में बदलाव करता है, लेकिन साथ ही संवैधानिक सुधारों और नए चुनावों की प्रक्रिया को बनाए रखता है।

एआईटीए ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को प्रशासक बनाये जाने का विरोध किया था । इसके साथ ही उन्होंने 27 अप्रैल के उस फैसले के कुछ हिस्सों को रद्द करने की मांग की थी, जिनके तहत उन्हें संविधान संशोधन, चुनाव और महासंघ के कामकाज से जुड़े व्यापक अधिकार दिए गए थे।

एआईटीए ने तर्क दिया कि उसके चुनावों में कोई गड़बड़ी या ऐसा कोई संस्थागत कामकाज ठप होने की बात सामने नहीं आई है, जिससे समानांतर प्रशासनिक ढांचा बनाने की जरूरत पड़े।

अदालत में एआईटीए का पक्ष रखने वाले पार्थ गोस्वामी ने पीटीआई से कहा ,‘‘ अदालत का फैसला एक लोकतांत्रिक संघ के रूप में एआईटीए की स्वायत्ता की रक्षा करता है ।’’

दूसरी ओर देववर्मन और पुरव राजा ने एकल न्यायाधीश के फैसले के उन हिस्सों को चुनौती दी, जिनमें सितंबर 2024 में चुनी गई कार्यकारी समिति को मान्यता दी गई थी और उसे अंतरिम ईकाई के तौर पर काम करने की इजाजत दी गई थी।

उन्होंने मांग की कि जब तक संविधान में संशोधन के बाद नए चुनाव नहीं हो जाते, तब तक महासंघ का कामकाज प्रशासक के ही अधीन रहे।

दोनों चुनौतियों के गुण-दोष पर कोई फैसला किए बिना खंडपीठ ने दोनों पक्षों की इस बात पर सहमति दर्ज की कि वे ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025’ और ‘राष्ट्रीय खेल प्रशासन नियमों, 2026’ के अनुसार एआईटीए के संविधान में संशोधन करने की दिशा में काम करेंगे।

अदालत ने अंतरिम कार्यकारी समिति को प्रशासक के संशोधनों के मसौदे पर सुझाव और ऐतराज जमा करने के लिये 25 जून तक का समय दिया है ।

भाषा मोना

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