शुरुआत अच्छी नहीं थी लेकिन हमने एक-दूसरे का हौसला बनाए रखा: मिश्रित टीम कांस्य के बाद नरूका

शुरुआत अच्छी नहीं थी लेकिन हमने एक-दूसरे का हौसला बनाए रखा: मिश्रित टीम कांस्य के बाद नरूका

शुरुआत अच्छी नहीं थी लेकिन हमने एक-दूसरे का हौसला बनाए रखा: मिश्रित टीम कांस्य के बाद नरूका
Modified Date: September 24, 2026 / 06:00 pm IST
Published Date: September 24, 2026 6:00 pm IST

नागोया, 24 सितंबर (भाषा) अनंतजीत सिंह नरूका और परिनाज धालीवाल की भारतीय स्कीट जोड़ी ने खराब शुरुआत के बावजूद दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और एक-दूसरे का हौसला बढ़ाते हुए अंतिम निशाने तक संघर्ष जारी रखा जिससे उन्होंने बृहस्पतिवार को यहां एशियाई खेलों की मिश्रित टीम स्पर्धा में ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया।

यह एशियाई खेलों की स्कीट मिश्रित टीम स्पर्धा में भारत का पहला पदक है। इस पदक के साथ भारतीय जोड़ी ने शानदार वापसी की क्योंकि क्वालीफिकेशन के शुरुआती दौर में नरूका और परिनाज ने 50 में से सिर्फ 44 निशाने साधे थे।

नरूका ने कहा, ‘‘हमारी शुरुआत मुश्किल रही। हम दोनों ने पहले दौर में अच्छा प्रदर्शन नहीं किया लेकिन फिर हमने एक-दूसरे से कहा कि हम अब भी वापसी कर सकते हैं। हमारे पास दो और दौर थे और हमने अंतिम निशाने तक लड़ने का फैसला किया।’’

भारतीय जोड़ी ने इसके बाद अपने प्रदर्शन में सुधार किया। दूसरे दौर में उन्होंने 47 निशाने साधे और तीसरे दौर में भी इतने ही निशाने लगाकर क्वालीफिकेशन में कुल 138 अंक जुटाए और चार टीम वाले फाइनल में जगह बनाई।

परिनाज ने कहा कि दोनों के बीच संदेश शुरू से अंत तक एक ही रहा कि अंतिम निशाने तक संघर्ष करते रहना है और नतीजे की चिंता बाद में करना।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अंत तक लड़ने के बारे में था। हम एक-दूसरे से कह रहे थे, ‘अपना सब कुछ झोंक देते हैं और तीसरे दौर के बाद देखते हैं कि क्या होता है।’ हमने वही किया।’’

नरूका के लिए एक-दूसरे का समर्थन करना मिश्रित टीम स्पर्धा की असली भावना को दर्शाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम एक-दूसरे का समर्थन कर रहे थे और लगातार कहते रहे कि हमें लड़ना है। यही मिश्रित टीम का मतलब है और यही होना भी चाहिए।’’

कोच फिलिपेली रिकार्डो के निर्देश भी बेहद सरल थे।

परिनाज ने बताया, ‘‘उन्होंने बस कहा, ‘आगे बढ़ते रहो, आगे बढ़ते रहो।’’

यह कांस्य पदक नरूका के करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनके नाम पहले ही दिल्ली में विश्व कप फाइनल का व्यक्तिगत कांस्य और ओलंपिक में चौथे स्थान का प्रदर्शन दर्ज है। हालांकि एशियाई खेलों का यह पदक उन्हें ओलंपिक के प्रदर्शन से अधिक संतोष दे रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह (एशियाई खेलों का पदक) ज्यादा खास है। ओलंपिक में आप चौथे स्थान पर आते हैं लेकिन अगर पोडियम पर नहीं खड़े होते तो उसका कोई मतलब नहीं रहता। आज हमने संघर्ष किया, अच्छा संघर्ष किया और कांस्य जीता।’’

इस नतीजे के साथ भारतीय स्कीट टीम के लिए ये दो दिन यादगार रहे जिसमें भारत ने तीन पदक जीते। नरूका को उम्मीद है कि यह सफलता इस खेल में आने वाले युवा निशानेबाजों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।

इस कांस्य के साथ नरूका और परिनाज दोनों के खाते में इन खेलों में दो-दो पदक हो गए हैं। नरूका इससे पहले पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे जबकि परिनाज भी महिला टीम के साथ पदक जीत चुकी हैं।

हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में व्यक्तिगत रजत और टीम कांस्य पदक जीतने वाले नरूका ने कहा कि भारतीय निशानेबाजी दल पर पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद बने दबाव के बीच यह सफलता खास तौर पर संतोषजनक है।

परिनाज के लिए यह पदक उस फैसले का परिणाम है जो उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद लिया था जब उन्होंने विदेश में पढ़ाई करने के बजाय निशानेबाजी को करियर के रूप में चुना था।

मायो कॉलेज से स्नातक होने के बाद उनके सामने विदेश जाकर पढ़ाई करने या निशानेबाजी जारी रखने का विकल्प था। उन्होंने वह रास्ता चुना जिसे वह वास्तव में पसंद करती थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह इसलिए करती हूं क्योंकि मुझे यह बेहद पसंद है। मैं इस खेल को लेकर जुनूनी हूं। यह मेरा शौक है और मुझे इसे करना बहुत पसंद है।’’

परिनाज ने कहा, ‘‘मायो से स्नातक होने के बाद मुझे विदेश जाकर पढ़ाई करने या निशानेबाजी अपनाने का विकल्प दिया गया था। मैं यही करना चाहती थी क्योंकि मैं अपने दिल की सुनना चाहती थी।’’

शूटिंग रेंज पर उन्हें आमतौर पर ‘परी’ नाम से जाना जाता है। यह उपनाम उनके करीबी दोस्तों और परिवार दिया जो बाद में निशानेबाजी जगत में भी लोकप्रिय हो गया।

उन्होंने कहा, ‘‘रेंज पर मेरे करीबी दोस्तों और परिवार ने मुझे परी कहना शुरू किया। धीरे-धीरे सभी लोग मुझे परी कहने लगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए जब कोई मुझे परी कहकर बुलाता है तो मैं समझ जाती हूं कि वह मेरे करीब है।’’

हालांकि इस पदक का जश्न मनाने के लिए नरूका के पास ज्यादा समय नहीं होगा। उनका अगला लक्ष्य दोहा में होने वाली विश्व चैंपियनशिप है जहां उनके पास भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करने का भी मौका होगा।

भाषा सुधीर पंत

पंत


लेखक के बारे में